
बिलासपुर, 12 अप्रैल। campussamachar.com, छत्तीसगढ़ सरकार (CG Govt) के सामाजिक आर्थिक जनगणना में जुटे शिक्षक और अन्य कर्मियों की एक दो नहीं अनगिनत परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों को फील्ड में हो रही परेशानी से साफ है कि सामाजिक आर्थिक जनगणना की प्रारंभिक तैयारियां जमीनी हकीकत से काफी दूर रहींं और शिक्षकों व अन्य कर्मियों को मैदानी काम के लिए फील्ड में उतार दिया गया है और अब यही आधी-अधूरी तैयारियां इस महत्वाकांक्षी योजना की पोल खोल रही हैं।
Bilaspur news : गौरतलब है कि एक अप्रेल से चल रहे कार्यक्रम के लिये शिक्षकों व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रगणक के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें सर्वे के लिए 400 परिवार की सूची ऑनलाइन व ऑफलाइन उपलब्ध करानी थी. साथ ही प्रधान मंत्री आवास हितग्राहियों की सूची, किसान पंजीयन, गऱीबी रेखा सर्वे सूची 2011 सहित पंचयात में जाब कार्ड धारी आदि का पूरा विवरण प्रदान करने वाली सूची दी जानी थी लेकिन हकीकत यह है कि यह सूची आज पर्यंत तक प्रगणकों को हार्ड कॉपी में उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इस काम में लगे शिक्षकों ने बताया कि अब तक केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं। इतना ही नहीं कहीं पर तो जरुरत से ज्यादा तो कही पर नाम मात्र के लिए प्रगणक टीम बनाई गई है। रोजगार सहायक से लेकर छोटे बड़े सभी अधिकारी सिर्फ और सिर्फ आंकड़े पूछकर खाना पूर्ति कर रहें है। कई जगहों पर और प्रगणक दल की मांग है फिर भी परिवार के अनुपात में वहाँ और दल का गठन नहीं किया जा रहा है।

Bilaspur education news इस काम में लगे शिक्षकों का कहना है कि इस माह में तेज गर्मी में टीम घर घर जाकर सर्वे कर रही है और कई टीमों के पास तो सर्वे फार्म भी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध नहीं हैं। उदाहरण के रूप में बिल्हा ब्लॉक के ग्राम जलसो में जहाँ लगभग 1100 परिवार पर 3 प्रगणक दल है तो ग्राम बैमा में 1100 परिवार पर तीन, नगोई में 1375 परिवार पर 4दल,वहीं पास लगे सेमरताल में जहाँ 1500 परिवार है सिर्फ दो दल का गठन कर कार्य का रिपोर्ट ली जा रही है। इन सभी गांवों में प्रगणक टीम बढ़ाने की मांग की जा रही है पर कोई उचित कार्यवाही नही हो पा रही है।

chhattisgarh news : शिक्षकों के लिए सबसे अधिक परेशानी की बात यह है कि स्कूलों में परीक्षा के साथ इसी माह बालकों का रिजल्ट भी तैयार करना है, ऐसे में उन्हें विद्यालय के लिए भी समय देना है । एक ओर गांव वाले है जो सभी जानकारी को पूर्णत: सही नहीं बताते वहीं दूसरी ओर कुछ जानकारी के आभाव में आधा अधूरा डाटा ही सामने आ रहा है। कुछ शिक्षकों ने संदेह व्यक्त किया है कि अगर ऐसे ही काम हुआ तो निर्धारित समय में सारा काम संभवत: न हो पाए। इसलिए संबंधित अधिकारियों को पूरी ईमानदारी के साथ कार्य करने के साथ ही इस काम में आने वाली समस्याओं को तत्काल दूर करने की पहल करने की जरूरत है।
