
- उनकी दो चर्चित पुस्तकें ”कला में विचार तत्व” और ”कम्पनी काल में पटना शैली की चित्रकला” भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग ने प्रकाशित की है। ‘दस कलाकार‘ शिल्प कला परिषद, पटना ने प्रकाशित किया है ।
- ललित कला अकादमी , नई दिल्ली की पत्रिका ”समकालीन कला” में इनके अनेक महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित हुए हैं। साथ ही इस पत्रिका के एक अंक-14 के अतिथि सम्पादक भी रहे हैं।
पटना, 17 अगस्त , पटना के प्रख्यात कला समीक्षक अवधेश अमन नहीं रहे। आज ( 17 अगस्त ) सुबह 4:00 बजे हृदयाघात से उनका देहांत हो गया। घर में फोन पर बात करने से पता चला कि रात में हल्का बुखार था। रात में 2:00 बजे तक सबके साथ जगे हुए थे, उसके बाद सोए हैं। बुखार के कारण गले में खरखराहट की आवाज थी, खांसी आने पर पसलियों में दर्द महसूस किया और लगभग 4:00 बजे से शांत हो गए।
कला दीर्घा, अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका में उन्होंने लगातार लिखा है और इस यात्रा में सदैव साथ रहे हैं। उनका अग्रज के रूप में बहुत स्नेह मिलता था। कला परिदृश्य पर लंबी बात करते थे। हाल में ही लखनऊ आए तो मेरे स्टूडियो भी गए और मेरे कला कर्म पर प्रकाशित पुस्तक को मांग कर लिया, बहुत खुश हुए। उनकी दो चर्चित पुस्तकें ”कला में विचार तत्व” और ”कम्पनी काल में पटना शैली की चित्रकला” भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रकाशन विभाग ने प्रकाशित की है। ‘दस कलाकार‘ शिल्प कला परिषद, पटना ने प्रकाशित किया है । ललित कला अकादमी , नई दिल्ली की पत्रिका ”समकालीन कला” में इनके अनेक महत्वपूर्ण लेख प्रकाशित हुए हैं। साथ ही इस पत्रिका के एक अंक-14 के अतिथि सम्पादक भी रहे हैं। कला दीर्घा, अंतरराष्ट्रीय दृश्य कला पत्रिका के अतिरिक्त कला समय , कला वीथिका , संस्कृति आदि पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित इनके शोधपरक आलेखों की एक श्रृंखला है।
“सहित्यधर्मी” पत्रिका का 12 वर्षों तक सम्पादन, ललित कला अकादमी, नई दिल्ली सहित अनेक संस्थाओं का प्रतिनिधित्व, तीन वर्षों तक बिहार ललित कला अकादमी के उपाध्यक्ष का दायित्व, पटना दूरदर्शन से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ”कला चक्र” का संचालन, आकाशवाणी के दिल्ली एवं पटना सहित कुछ केंद्रों से अनेक लोकप्रिय प्रसारण आदि अवधेश अमन की महत्वपूर्ण उपलब्धियां रही हैं। कला जगत में उनके द्वारा दिए गए अवदान को संकलित करने की आवश्यकता है।
