

- बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025’ कार्यक्रम के तहत ‘देवनागरी लिपि का मानकीकरण’ विषय पर हिंदी कार्यशाला का हुआ आयोजन
लखनऊ, 22 सितम्बर , बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय,लखनऊ के हिंदी प्रकोष्ठ, द्वारा ‘हिंदी दिवस’ के उपलक्ष्य पर ‘हिंदी पखवाड़ा उत्सव 2025’ के निमित्त सप्तदिवसीय हिंदी कार्यशाला के “देवनागरी लिपि का मानकीकरण” विषय पर हिंदी कार्यशाला का आयोजन,22 सितम्बर,2025 को अम्बेडकर अध्ययन विद्यापीठ सभागार कक्ष,बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर में किया गया। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ. सर्वेश कुमार मिश्र (प्राचार्य,राजकीय महिला महाविद्यालय, मिश्रिख, सीतापुर) उपस्थित रहे! डॉ.बलजीत श्रीवास्तव जी ने स्मृति चिन्ह व पट्टिका पहनाकर उनका स्वागत किया.

विषय विशेषज्ञ डॉ. सर्वेश मिश्रा ने सभा का मार्गदर्शन किया! डॉ. मिश्रा ने देवनागरी लिपि के उद्भव-विकास से लेकर उसके विविध पक्षों पर अपनी बात रखी! उन्होंने देवनागरी लिपि का विकास 7-8 वीं शताब्दी से माना! उनका मानना है कि आज की देवनागरी लिपि 12-13 वीं सदी की देवनागरी लिपि का रूप है! वे कहते हैं कि 19वीं तथा 20वीं शताब्दी में मानकीकरण के वैयक्तिक और संस्थागत प्रयासों ( यथा हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग और काशी नागरी प्रचारिणी सभा, काशी संस्थान) की मदद से अखिल भारतीय लिपि के रूप में विकसित होने लगी। आज भी यह एकमात्र लिपि है जो भारत की सभी भाषाओं की भीषण विशेषताओं को धारण करके राष्ट्रीय एकीकरण का सशक्त माध्यम बन सकती है! अन्त में उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि तमाम विश्वविधालय के शिक्षक और शोधार्थी मिलकर भाषा व लिपि पर काम करें जिससे वह और सरलीकरण के रूप में हमारे सामने आ सके.
सभागार में कुल 38 विद्यार्थियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई ! कार्यक्रम का संयोजन सहायक निदेशक (राजभाषा) व सहायक आचार्य हिंदी विभाग बी.बी.ए.यू, डॉ.बलजीत कुमार श्रीवास्तव द्वारा किया गया.
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