

- मुख्य वक्ता आचार्य विजय कुमार कर्ण ने 3 T सिद्धांत दिया पहला T (Time management)समय प्रबंधन, दूसरा T(tongue management)वाणी प्रबंधन, तीसरा T (Thought Management) विचार प्रबंधन दिया।
- संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डा बिपिन कुमार झा ने मुख्य वक्ता तथा उपस्थित सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया।
लखनऊ , 26 फरवरी , बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय ( BBAU Lucknow ) और भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग द्वारा वैश्विक परिदृश्य में शैव दर्शन का महत्व (Relevance of Shaivism in Global Perspective) पर व्याख्यान माला का आयोजन किया जा रहा है…
प्रथम व्याख्यान इस कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय दर्शन के आलोक में विकसित भारत 2047 की संकल्पना पर व्याख्यान आचार्य विजय कुमार कर्ण द्वारा प्रस्तुत किया गया। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग द्वारा , भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद् के संयुक्त तत्वधान में एक व्याख्यान वाला आयोजित की जा रही है, द्वितीय व्याख्यान का विषय ~ भारतीय दर्शन के आलोक में विकसित भारत 2047 की संकल्पना.

मुख्य वक्ता ~ आचार्य विजय कुमार कर्ण, अधिष्ठाता, छात्र कल्याण नव नालंदा महाविहार, नालंदा।
मुख्य अतिथि~डॉ सुमन के एस, OSD, प्रशासनिक, त्रिपुरा विश्वविद्यालय।
कार्यक्रम अध्यक्ष~ डॉ रिपुसूदन सिंह विभाग अध्यक्ष, संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग बीबीएयू।
कार्यक्रम संयोजक~ विभागीय
सहायक आचार्य डॉ बिपिन कुमार झा तथा डॉ रमेश चंद्र नैलवाल ।
कार्यक्रम का संचालन विभाग के सहायक आचार्य डॉ रमेश चंद्र नैलवाल ने किया। कार्यक्रम का प्रारंभ सुश्री प्रिया वर्मा के द्वारा वैदिक मंगलाचरण से हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य वक्ता एवं मंच पर उपस्थित अन्य विद्वज्जनों तथा उपस्थित विद्वत्परिषद का वाचिक स्वागत एवं व्याख्यान का परिचय डॉ रिपुसूदन सिंह महोदय ने किया, जो कि संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग के विभाग अध्यक्ष हैं।

मुख्य वक्ता आचार्य विजय कुमार कर्ण ने विकसित भारत की संकल्पना को प्रस्तुत किया उन्होंने बताया कि अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पर्यावरण को बढ़ावा देना ही अभ्युदय है और इस प्रकार का अभ्युदय ही विकास है इसके द्वारा ही विकसित भारत को साकार किया जा सकता है भारत में वर्तमान समय में हम देख रहे हैं कि आध्यात्मिक उदय हुआ है कुंभ के माध्यम से हम ऐसा देख रहे हैं मनुष्य के मूलभूत आवश्यकता रोटी, कपड़ा और मकान के साथ-साथ पढ़ाई और दवाई भी है और साथ ही साथ स्वाभिमान के साथ जीना ही अभ्युदय है यही अभ्युदय ही विकास है और इससे ही विकसित भारत की संकल्पना की जा सकती है।

मुख्य वक्ता आचार्य विजय कुमार कर्ण ने 3 T सिद्धांत दिया पहला T (Time management)समय प्रबंधन, दूसरा T(tongue management)वाणी प्रबंधन, तीसरा T (Thought Management) विचार प्रबंधन दिया। इसके साथ ही उन्होंने नैतिक नियमों और कर्तव्य का अनुसरण करने को कहा तथा साथ ही साथ सत्यं वद धर्मं चर आदि ध्येय वाक्यों को बताया। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय संस्कृति की मूल उद्भावना विवाह और परिवार के महत्व को बताया साथ ही साथ विकसित भारत के बनने में जो सबसे मुख्य बाधा है समरसता का अभाव उसको रेखांकित किया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ सुमन के एस ने व्याख्यान दिया। डॉ सुमन के व्याख्यान में मुख्य तीन विषय थे, जिसमें उन्होंने सबसे पहले आचार्य के योगदान को बताया कि कैसे वह छात्रों के द्वारा भविष्य का निर्माण व राष्ट्र का निर्माण करते हैं, दूसरा उन्होंने प्रभुत्व अर्थात् उत्तरदायित्व आदि को बताया है . साथ ही साथ कादंबरी के शुकनासोपदेश के उदाहरण के माध्यम से धन संपत्ति का सदुपयोग कैसे करें इसको बताया। इसके पश्चात संस्कृत एवं वैदिक अध्ययन विभाग के सहायक आचार्य डा बिपिन कुमार झा ने मुख्य वक्ता तथा उपस्थित सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रतिवेदन प्रस्तुत कर्त्री ~ प्रिया वर्मा, परास्नातक द्वितीय वर्ष रहीं .

