

- अनीता श्रीवास्तव द्वारा सत्र 2024 25 में कक्षा 10 में गणित विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के लिए शालिनी पाल को पुरस्कृत किया गया। उसके बाद छात्राओं को पुष्टाहार वितरित किए गए।
- बालिका विद्यालय में बाल दिवस का भव्य आयोजन
लखनऊ , 14 नवंबर 2025 बाल दिवस केवल एक स्मरण–दिवस नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर बसे उस शाश्वत बालक का उत्सव है, जो उम्र बढ़ने पर भी कभी पूरी तरह समाप्त नहीं होता। यह वह दिन है जब हम बच्चों को देखकर अपने भीतर झाँकते हैं क्योंकि बालपन केवल जीवन की एक अवस्था नहीं बल्कि एक दार्शनिक दृष्टि है: निष्कपटता, आश्चर्य, प्रश्नाकुलता और सृजनशीलता का संगम। अरस्तू कहते हैं कि दर्शन की शुरुआत आश्चर्य से होती है। बच्चे संसार को आश्चर्य की खुली आँखों से देखते हैं—एक सामान्य-सी तितली उनके लिए चमत्कार होती है, एक कागज़ उनका आकाश बन जाता है। यही आश्चर्य मनुष्य में जिज्ञासा जगाता है, और जिज्ञासा ज्ञान का प्रथम सोपान है। इस प्रकार, बाल दिवस हमें याद दिलाता है कि ज्ञान की जड़ों में बालकपन की जिज्ञासा ही बहती है।

बच्चों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे पूर्वाग्रहों और भय से मुक्त होते हैं। वे मनुष्य को मनुष्य की तरह देखते हैं—जाति, धर्म, भाषा और वर्ग की दीवारें उनके मन में नहीं उगतीं। उनकी आँखों में विश्व एक ही परिवार है। इसलिए बाल दिवस हमें यह भी सिखाता है कि शांति, बंधुत्व और करुणा के बीज यदि बोने हों तो बचपन की सरलता को पुनः जीवित करना होगा। एक बच्चा खेलता नहीं, वह रचता है। उसकी कल्पना मिट्टी को महल, लकड़ी को जहाज और शब्दों को ब्रह्माण्ड में बदल देती है। दर्शन हमें बताता है कि सृजनशीलता वही शक्ति है जिसने मनुष्य को सामान्य जीव से एक चिंतनशील प्राणी बनाया।
अतः बाल दिवस हमें रचनात्मकता का उत्सव मनाने का अवसर देता है—क्योंकि जो समाज कल्पना को महत्व नहीं देता, वह प्रगति से दूर जा चुका होता है। किसी समाज के नैतिक स्तर का परीक्षण इस बात से होता है कि वह अपने बच्चों के साथ कैसा व्यवहार करता है। जहाँ शिक्षा, पोषण, सुरक्षा, स्वतंत्रता और अवसर बच्चों को सहज उपलब्ध होते हैं, वही समाज नैतिक रूप से विकसित माना जाता है। इसलिए बाल दिवस हमें एक गहरी दार्शनिक जिम्मेदारी भी सौंपता है कि हम ऐसी दुनिया बनाएं जिसमें हर बच्चा खिल सके। जीवन में उम्र बढ़ती है, परन्तु भीतर का बालक तभी मरता है जब हम प्रश्न पूछना छोड़ देते हैं, कल्पना खो देते हैं, और आश्चर्य से दूरी बना लेते हैं। बाल दिवस हमें प्रेरित करता है कि हम अपने भीतर के उस बालक को बचाकर रखें— जो सपने देख सके, जो सीखने के लिए आतुर रहे, जो करुणा और निष्कपटता से भरा हो।

यह बताते हुए बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने विद्यालय में आयोजित बालदिवस समारोह का विषय प्रवर्तन किया। इस कार्यक्रम का आयोजन भारत विकास परिषद महिला शाखा चौक के सौजन्य से किया गया। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने शाखा की सचिव मंजू अग्रवाल, महिला सहभागिता साधना रस्तोगी और सदस्य शालिनी रस्तोगी का स्वागत पुष्प देकर किया। उसके पश्चात सभी ने मां सरस्वती तथा पंडित जवाहरलाल नेहरू की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। मंजू अग्रवाल ने भी छात्राओं को बाल दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वह अपने जीवन में सफलता को अर्जित करें। इस कार्यक्रम का आयोजन पूनम यादव, ऋचा अवस्थी, रागिनी यादव, मंजुला यादव और प्रतिभा रानी के निर्देशन में हुआ।
सर्वप्रथम नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें छात्राओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किये। इसमें कक्षा 9 की रोशनी प्रथम, कक्षा 11 की शिल्पी द्वितीय और शालिनी तृतीय स्थान पर रहे। गायन प्रतियोगिता में कक्षा 8 की इल्मा प्रथम, रुखसार द्वितीय और कक्षा 10 की मुस्कान तृतीय स्थान पर रही। बाल दिवस के अवसर पर छात्राओं ने बैलून रेस और म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग किया। बैलून रेस में कक्षा 8 की इल्मा प्रथम , कक्षा 7 कृतिका द्वितीय और दिव्यांशी तिवारी तृतीय स्थान पर रहे।

म्यूजिकल चेयर प्रतियोगिता में कक्षा 12 की चंचल प्रथम, कक्षा 9 की दिव्यांशी द्वितीय और कक्षा 9 की तानिया तृतीय स्थान पर है। इन सभी कार्यक्रमों की निर्णायक उत्तरा सिंह रही। सभी विजयी छात्राओं को पुरस्कार प्राप्त हुए। इसके अतिरिक्त कक्षा 12 की सृष्टि सिंह, मुस्कान कनौजिया, मानसी, काजल को कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए पुरस्कृत किया गया। अनीता श्रीवास्तव द्वारा सत्र 2024 25 में कक्षा 10 में गणित विषय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने के लिए शालिनी पाल को पुरस्कृत किया गया। उसके बाद छात्राओं को पुष्टाहार वितरित किए गए।
