
- परिषद के स्थापना दिवस पर लखनऊ विश्वविद्यालय के डी.पी.ए सभागार में गंगोष्ठी का आयोजन
लखनऊ, 10 जुलाई,campus samachar.com, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ( Akhil Bharatiya Vidyarthi Parishad) अवध प्रांत की और से लखनऊ महानगर द्वारा राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस के अवसर पर 9 जुलाई को लखनऊ विश्वविद्यालय के डी.पी.ए सभागार में गंगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप प्रदेश महामंत्री अधिवक्ता परिषद मीनाक्षी सिंह परिहार, प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में अभाविप अवध प्रांत के उपाध्यक्ष डॉ०सुभाष महर्षि,कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महानगर मंत्री शाश्वत सांस्कृत एवं प्रत्यूष पांडे ने ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती एवं युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन कर दीप प्रज्वलित किया।
राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस पर कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अधिवक्ता परिषद की प्रदेश महामंत्री मीनाक्षी सिंह परिहार ने युवा तरुनाई को राष्ट्रीय विद्यार्थी दिवस की शुभकामनाएं देकर अपने संबोधन में कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की संकल्प यात्रा इतनी विराट है कि इसे कुछ क्षणों में बयां कर पाना हमारी क्षमता से परे है,छात्र हित में बात करने के लिए अगर कोई संगठन सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका में अगर कोई संगठन दिखाई देता है तो वह है अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद। इसे हम एबीवीपी (ABVP) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक भारतीय छात्र संगठन है जो कि भारत ही नहीं बल्कि विश्व का सबसे बड़ा छात्र-संगठन है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने 1948 में अपनी गतिविधियाँ शुरू कीं और 9 जुलाई, 1949 को सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1860 (पंजीकरण संख्या- एस-385/1949-50) के तहत संयुक्त कर्मचारी कंपनियों के रजिस्ट्रार के साथ एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के रूप में पंजीकृत हुई।
9 जुलाई, 1949 अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् की स्थापना की स्थापना राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कार्यकर्ता बलराज मधोक जी की अगुआई में की गयी थी। मुंबई के प्रोफेसर यशवंत केलकर इसके मुख्य कार्यवाहक बने। विद्यार्थी परिषद का नारा है ज्ञान, शील और एकता। एबीवीपी न तो कोई ट्रेड यूनियन है और न ही किसी राजनीतिक दल की शाखा या विंग है। यह शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने वाला एक स्वतंत्र सामाजिक संगठन है।
प्रवासी कार्यकर्ता के रूप में उपस्थित डॉ० सुभाष महर्षि ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थी परिषद युवाओं को न केवल नेतृत्व प्रदान करता है बल्कि अनुशासन में भी रहना सिखाता है, अपने संबोधन में प्रान्त उपाध्यक्ष ने विद्यार्थी परिषद के ज्ञान,शील ,एकता के मंत्र को उच्चारित करते हुए कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद युवाओं के बीच में अपने ज्ञान, और अनुभव से शील यानि संगठन की सभ्यता,आचरण,अनुशासन के दायरे में रहकर एकता के सूत्र में पिरोने का कार्य करता है।
स्थापना काल से ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने छात्र हित और राष्ट्र हित से जुड़े प्रश्नों को प्रमुखता से उठाया है और देश व्यापी आंदोलनों का नेतृत्व किया है। आज इस संगठन से जुड़े रहे लोग समाज-जीवन के हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बांग्लादेशी अवैध घुसपैठ और कश्मीर से धारा ३७० को हटाने के लिए विद्यार्थी परिषद समय-समय पर आदोलन चलाते रहा है। बांग्ला देश को तीन बीघा भूमि देने के विरुद्ध परिषद ने ऐतिहासिक सत्याग्रह किया था।
विद्यार्थी परिषद् देशभर के अनेक राज्यों में प्रकल्प चलाती है। बिहार में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नाम सबसे ज्यादा रक्तदान करने का रिकॉर्ड है। इसके अतिरिक्त निर्धन मेधावी छात्र, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिय़े निजी कोचिंग संस्थानों में नहीं जा सकते उनके लिये स्वामी विवेकानंद नि:शुल्क शिक्षा शिविर का आयोजन किया जाता है।
राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की ओर से हर साल आयोजन किया जाता है जिसके अंतर्गत दूसरे राज्य में रहने वाले छात्र अन्य राज्यों में प्रवास करते हैं और वहां की संस्कृति और रहन-सहन से परिचित होते हैं। राष्ट्रवादी छात्रों के इस संगठन की हर वर्ष देशव्यापी सदस्यता होती है। देश के सभी विश्वविद्यालयों और अधिकांश कॉलेजों में परिषद की इकाईयां हैं। अधिकांश छात्रसंघों पर परिषद का ही अधिकार है। संगठन का मानना है कि आज का छात्र कल का नागरिक है। हर वर्ष होने वाले प्रांतीय और राष्ट्रीय अधिवेशनों के द्वारा नई कार्यसमिति गठित होती हैं और वर्ष भर के कार्यक्रमों की घोषणा होती है।
संपूर्ण संगोष्ठी कार्यक्रम का संचालन लखनऊ विश्वविद्यालय इकाई के सह मंत्री विवेक मिश्रा ने किया कार्यक्रम में आए हुए अतिथियों का स्वागत अभाविप लखनऊ महानगर मंत्री शाश्वत सांस्कृत ने तथा आभार ज्ञापन प्रत्यूष पांडे ने किया। संगोष्ठी कार्यक्रम में अभाविप के तमाम शिक्षक एवं विद्यार्थी कार्यरत उपस्थित रहे।
