
लखनऊ, 8 अप्रैल। campussamachar.com, नए शैक्षिक सत्र (Academic Session 2023-24 ) शुरू होते ही स्कूलों में मोटी रकम कमाने के लिए पुस्तकों , स्टेशनरी एवं अन्य शैक्षिक सामग्री खरीदने के नाम पर खेल शुरू हो गया है । राजधानी लखनऊ सहित प्रदेश के सभी बड़े – छोटे शहरों के विद्यालयों के प्रबंधक अपनी पसंद की दुकानों और बुक सेलर्स के यहां अभिभावकों को भेजकर बुक्स, ड्रेस और स्टेशनरी व अन्य सामग्री खरीदने के लिए मजबूर कर रहे हैं। कई स्कूलों में हालत यह हो गई है कि उन्होंने अपने विद्यालय परिसर में ही यह काम चोरी छुपे कर रहे हैं जबकि कई विद्यालयों ने सत्र शुरू होने से मात्र 2 दिन पहले अभिभावकों को बुक लिस्ट के साथ दुकान की जानकारी देकर भेज दिया । ऐसे में अभिभावकों के सामने इन्हीं बुक सेलर्स के यहां से पुस्तकें खरीदना मजबूरी हो गई है.
Academic Session 2023-24 : अभी तक इस मनमानी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यही कारण है कि शासन द्वारा निर्धारित पुस्तकों के अलावा ऊंची दर पर निजी प्रकाशकों की भी पुस्तकें विद्यार्थियों को खरीदनी पड़ रही हैं। बुक सेलर्स और प्रबंधन के बीच ऐसा करने की वजह बुक सेलर द्वारा दिया जाने वाला मोटा कमीशन है. हर बुक सेलर और स्कूल मैनेजर किसी भी प्रकार के कमीशन के लेन-देन की बात से इनकार करते हैं और कहते हैं कि अभिभावक कहीं से भी पुस्तकें खरीद सकता है लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं हो रहा है।
lucknow education news : हैरत की बात है कि बुक स्लिप में दर्ज किताबें उसी बुकसेलर के पास मिलेंगी, जहां स्कूल मैनेजर ने पहले से बातचीत कर रखी है । इसीलिए बुक सेलर सभी स्कूलों की किताब रखने की वजह अपने अपने सेटिंग वाले स्कूल प्रबंधकों के स्कूलों के विद्यार्थियों की किताबें रखते हैं। पैरंट्स वेलफेयर एसोसिएशन पीके श्रीवास्तव का कहना है कि बड़े पैमाने पर लोगों का शोषण हो रहा है। जल्दी ही इस मुद्दे पर जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन दिया जाएगा।
