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सक्षम प्राधिकारी द्वारा माननीय न्यायालय में अवमाननावाद की स्थिति होने पर अपनी जिम्मेदारी लेने की बजाय अपने बचाव में उच्च स्तर के अधिकारियों को मार्गदर्शन हेतु भेजे गए पत्र की प्रति माननीय न्यायालय में दाखिल कर दी जाती है .
लखनऊ, 04 अक्तूबर, प्रदेश के बेसिक , माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने आदेश जारी किया है कि न्यायालय के निर्णीत मामलों में उच्च अधिकारियों से अनावश्यक मार्गदर्शन मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी.
शासन की ओर से भेजे गए पत्र में अपर मुख्य सचिव ने कहा है कि संज्ञान में आया है कि माननीय न्यायालय के कई प्रकरणों में जब माननीय न्यायालय द्वारा सक्षम प्राधिकारी को निर्णय लेने हेतु आदेशित किया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा कई प्रकरणों में सक्षम होने के बाद भी अपने स्तर से निर्णय न लेकर उच्च स्तर के अधिकारियों को अनावश्यक रूप से मार्गदर्शन के लिए प्रकरण संदर्भित कर दिया जाता है.
सक्षम प्राधिकारी द्वारा माननीय न्यायालय में अवमाननावाद की स्थिति होने पर अपनी जिम्मेदारी लेने की बजाय अपने बचाव में उच्च स्तर के अधिकारियों को मार्गदर्शन हेतु भेजे गए पत्र की प्रति माननीय न्यायालय में दाखिल कर दी जाती है , जिससे और अवमाननावाद में सक्षम प्राधिकारी के साथ-साथ उच्च अधिकारियों को भी जिम्मेदारी उत्तरदायित्व ना होने के बाद भी प्रतिवादी बनाकर व्यक्तिगत रूप से नोटिस तामील की जाती है.
पार्थ सारथी सेन शर्मा अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश ने पत्र में लिखा है कि उपरोक्त के दृष्टिगत सभी को निर्देशित किया जाता है कि माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन हेतु सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों /अधिनियमों एवं शासनादेशों के आलोक में समुचित परीक्षण कर गुण दोष के आधार पर नियम संगत निर्णय लिया जाएगा और प्रकरण उच्च स्तर पर संदर्भित नहीं किया जाएगा .
पत्र में आगे कहा गया है कि उपरोक्त निर्देशों का समस्त सक्षम अधिकारियों द्वारा सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. यदि किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्देशों की अवहेलना की जाती है तो यह माना जाएगा कि सक्षम प्राधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन करने में सक्षम नहीं है और उसके विरुद्ध गंभीरता पूर्वक सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया जाएगा. माननीय न्यायालय के आदेशों के दृष्टिगत प्रकरणों के तुरंत निस्तारण हेतु उपरोक्त निर्देशों के प्रति व्यक्तिगत ध्यानाकर्षण कर नियमानुसार कार्रवाई अपेक्षित है.
पीड़ित पक्ष को न्याय भी नहीं मिल पाता
शिक्षा विभाग में अधिकतर मामले न्यायालयों से जुड़े होने के कारण न केवल विलंब होता है बल्कि पीड़ित पक्ष को न्याय भी नहीं मिल पाता है . शिक्षा विभाग के कई अधिकारी इस मामले में कोर्ट कचहरी मेंउलझे रहते हैं और दूसरे अधिकारियों को भी उलझाए रखते हैं, जिससे विभागीय कामकाज बुरी तरह से प्रभावित होता है . अब मान जा रहा है अपर मुख्य सचिव की इस निर्देश के बाद लापरवाही दिखाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी . सरकार के इस फैसले पर विभिन्न शिक्षक संगठनों ने अपनी अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. माध्यमिक शिक्षक संघ ( पांडेय गुट ) के प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने इसे सराहनीय कदम बताया है उन्होंने कहा कि अब शिक्षा विभाग के अधिकारी किसी प्रकार की हीलाहवाली नहीं करपाएंगे.
देखें आदेश

