
- राजगीर के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को बौद्धिक संबोधन देते हुए नालंदा विभाग के बौद्धिक प्रमुख प्रो विजय कर्ण ने आगे कहा कि शक्ति के अभाव में अच्छी व कल्याणकारी बातों को भी कोई नहीं सुनता अंत: शक्ति की प्राप्ति केलिए भी तपस्या करनी पड़ती है.
राजगीर / पटना , 28 सितम्बर , प्रोफ़ेसर विजय कुमार कर्ण बौद्धिक प्रमुख नालंदा विभाग ने शस्त्र पूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि विजयदशमी के उपलक्ष्य में आयोजित यह शस्त्र पूजन कार्यक्रम इसलिए अधिक महत्त्वपूर्ण है कि इस विजयदशमी के पश्चात संघ शताब्दी वर्ष तक की यात्रा पूर्ण करनेवाला है. इस यात्रा में अनेक झंझावात व संघर्ष के साथ हर्ष के भी अनेक अवसर देखा. अपना भारत शास्त्र व शस्त्र दोनों को सम्मान करनेवाला देश है. शस्त्र के अभाव में शास्त्र अपना सिर धुनने लगता है तथा अपनी रक्षा नही कर पाता है इतिहास में अनेक अवसरों पर यह देखने को मिला.

राजगीर के शस्त्र पूजन कार्यक्रम में स्वयंसेवकों को बौद्धिक संबोधन देते हुए नालंदा विभाग के बौद्धिक प्रमुख प्रो विजय कर्ण ने आगे कहा कि शक्ति के अभाव में अच्छी व कल्याणकारी बातों को भी कोई नहीं सुनता अंत: शक्ति की प्राप्ति केलिए भी तपस्या करनी पड़ती है तथा शक्ति के प्रयोग के पश्चात पुन:उन शस्त्रों की पूजा का भी विधान है. प्रभु राम का लंका विजय के बाद शस्त्रों का पूजन उदाहरण है.

. शक्ति का उपयोग असत्य पर विजय के लिए है. अहंकार पर मर्यादा की विजय है. नकारात्मकता पर सकारात्मकता की जीत है. पाप समाप्त कर पुण्य वातावरण में धर्म की स्थापना हेतु है जिससे समस्त लोक अपने अपने आश्रमों के अनुरूप धर्मों का पालन कर सके. इस अवसर पर हम यह संकल्प ले सकते हैं कि हमारे अन्दर भी जो दुर्गुण है उनको त्यागते हुए सद्गुणों को धारण करेंगे एवं सज्जन शक्ति का संग्रह करेंगे. इस कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक बन्धु उपस्थित रहे.

