- उत्तर प्रदेश के शिक्षक-कर्मचारियों को भ्रमित करने के उद्देश्य से NPS को बेहतर बताया जा रहा है
- आज तो एनपीएस के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं

लखनऊ. अटेवा के अनवरत संघर्ष से उत्तर प्रदेश के सभी राजनैतिक दलों में पुरानी पेंशन को लेकर मंथन चल रहा है। इस वक्त के चुनाव का यह सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है, इस पर सत्तारूढ़ दल के प्रमुख नेताओं को भी सफाई देनी पड़ गयी, जिस विषय पर पिछले पाँच वर्षों के दौरान एक बार भी बात नहीं कि अचानक वह मुद्दा उनके लिए प्रमुख हो गया। दुर्भाग्य की बात है पिछले पाँच वर्ष के शासन काल मे उन्हें एक बार भी पुरानी पेंशन की याद नही आयी। इतना ही नहीं उन्होंने ज्ञापन तक लेना मुनासिब नहीं समझा। जबकि शासन के द्वारा जो उदाहरण प्रस्तुत किया गया है वह कई मायनों में तर्क संगत नहीं है। इसमें तमाम तथ्यों का न तो जिक्र है, न ही उन्हें स्पस्ट किया गया है।
कोई पेंशन व्यवस्था नहीं
विशेष बात यह है कि NPS कोई पेंशन व्यवस्था नही है बल्कि यह एन्युटी है जिसे स्वनिवेशित धन योजना कहा जा सकता है, पूरे सेवाकाल के दौरान जो धन इकट्ठा होगा उसी का 40% को पुनर्निवेश करके उसी हिसाब से पेंशन निर्धारित होगी, जिसे सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों के माध्यम से दिया जाएगा और सरकार का कोई हस्तक्षेप नही रहता है, यह रकम इतनी कम होती है कि इसका वार्षिक मूल्य सूचकांक से कोई लेना-देना नहीं होता है। सबसे बड़ी बात की एक बार पेंशन तय हो जाने के बाद ताउम्र उतनी ही पेंशन मिलेगी मूल्य सूचकांक कुछ भी हो। क्योंकि इसमें पेंशन की भांति महंगाई राहत या अन्य कोई लाभ नहीं जुड़ते। जैसे कि पुरानी पेंशन में पेंशनर की आयु 80 वर्ष होने पर 20% बढ़ती है और 100 वर्ष होने पर यह दोगुनी हो जाती है, लेकिन NPS में तो फिक्स है। साथ ही पुरानी पेंशन की भांति इसमें कोई न्यूनतम राशि निर्धारित नहीं है।
शासन के तर्क समझ से परे
शासन द्वारा जो उदाहरण दिया गया है उसमें नौकरी लगने की उम्र 28 वर्ष बताई गई है और उस व्यक्ति का 32 वर्ष नौकरी के पश्चात रिटायर होना दिखाया गया है, परन्तु नौकरी प्राप्त करने की समय सीमा 40 वर्ष है ऐसी स्थिति में क्या होगा?? साथ ही जो कार्मिक 10 वर्ष की सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त होते है उनके लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था में प्रावधान है, उदाहरण में यह स्पष्ट नही है कि जब NPS कर्मचारी 10 वर्ष की सेवा के पश्चात रिटायर होगा तो उसका क्या होगा।
हमें तो पुरानी पेंशन ही चाहिए
शासन के द्वारा यह बताया गया कि कर्मचारी का 10% अंशदान नयी पेंशन योजना के अंतर्गत होता है जबकि सरकार का 14% साथ ही यह भी कहा कि कर्मचारी यदि चाहे तो वह अपना अंशदान बड़ा सकता है जिसमे यह नहीं बताया गया कि क्या सरकार भी अपना अंशदान उसी अनुरूप करेगी?? अथवा उसे टियर 2 खाते में डाला जाएगा। इतने वर्षों बाद भी शायद ही किसी कर्मचारी ने टियर 2 खाता खोला हो क्योंकि जब 10% स्वयं कट रहा है तो इस महंगाई के दौर में घर भी चलाएगा या सिर्फ बचत ही करेगा।
जबकि वास्तविकता में जो उदाहरण आज आ रहे हैं उनमें NPS के कर्मचारी जो 12 से 15 वर्ष तक कि सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए हैं उन्हें 5% से 6% ही पेंशन के रूप में मिला जो हमेशा इतना ही रहेगा। इस पेंशन से आखिर कैसे उस व्यक्ति की सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा होगी।
शासन ने जो उदाहरण प्रस्तुत किया इसमें यह भी नहीं बताया कि यह गणना किस प्रकार से की गई है, क्योंकि NPS में कुल 5 प्रकार की गणनाओं का प्रावधान है, और प्रत्येक गणना करने पर 2 से 3 हज़ार तक का अंतर आ जाता है, सम्भव है एक साथ, एक पद से सेवानिवृत्त अलग-अलग व्यक्तियों को अलग-अलग पेंशन प्राप्त हो।
भ्रमित करने के उद्देश्य से NPS को बेहतर बताया जा रहा
NMOPS के राष्ट्रीय अध्यक्ष अटेवा के अध्यक्ष विजय कुमार ‘बन्धु’ ने कहा मुख्य सचिव ने जो बैठक करके नयी पेंशन व्यवस्था को बेहतर बताने का काम कर रहे हैं, उससे वह शिक्षक कर्मचारियों को भ्रमित कर रहे हैं। उन्हें भ्रमित करने के उद्देश्य से NPS को बेहतर बताया जा रहा है, जबकि यह व्यवस्था अन्यायपूर्ण, शोषणकारी और अनिश्चितताओं से भरी हुई है, इसमें कुछ भी निश्चित नहीं है और यह पूंजीपतियों को ध्यान में रखकर बनायी गयी है। हमे तो सिर्फ और सिर्फ पुरानी पेंशन चाहिए ।
शोषणकारी व्यवस्था का शिकार बन रहे
अटेवा के प्रदेश महामंत्री, डॉ नीरजपति त्रिपाठी ने कहा जो तर्कहीन तथ्यों के साथ NPS की खूबियां बता रहे हैं जबकि आज इसके उदाहरण सामने आने लगे हैं और लोग इस शोषणकारी व्यवस्था का शिकार बन रहे हैं।
निष्पक्ष रूप से आंकलन करना चाहिए
प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ राजेश कुमार ने बताया कि कर्मचारियों के हितों को देखते हुए निष्पक्ष रूप से आंकलन करना चाहिए न कि किसी के प्रभाव में आकर। जिस दिन वे ऐसा करेंगे स्वयं ही जान जाएंगे कि NPS क्या है।
