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बिलासपुर. गुरू घासीदास विश्वविद्यालय (Guru Ghasidas Vishwavidayalaya Koni, Bilaspur, (C.G.) का 13वां स्थापना दिवस समारोह 15 जनवरी सभागार में आयोजित हुआ। साल 2009 में केंद्रीय विश्वविद्यालय के उन्नयन के पश्चात यह स्थापना दिवस का 13वां वर्ष है। कोविद.19 के सामान्य नियमों का पालन करते हुए यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम अतिथियों ने द्वीप प्रज्ज्वलन कर मां सरस्वती की प्रतिमा के चित्र पर माल्यार्पण किया। तत्पश्चात नन्हें पौधे से अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध शिक्षाविद अतुल कोठारी ने आभासी संचार माध्यम से संबोधित करते हुए सभी को विश्वविद्यालय के 13वें स्थापना दिवस पर बधाई एवं शुभकामनाएं प्रदान कीं।
विश्वविद्यालय ( Guru Ghasidas Vishwavidayalaya Koni, Bilaspur, (C.G.) की स्थापना छत्तीसगढ़ के प्रख्यात संत शिरोमणि गुरु घासीदास जी के नाम पर है जिन्होंने समाज सुधार और समाज सश्कितकरण हेतु अथक प्रयास किये। उनका व्यक्तित्व संस्था के रूप में विकसित हुआ है। हमें उनके बताए आदर्श वाक्य मनखे-मनखे एक समान को जीवंत करते हुए आगे चलना है।
नई शिक्षा नीति को बताई जरूरत
नई शिक्षा नीति 2020 को वर्तमान समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि यह हमारे गौरवशाली अतीत की शिक्षा व्यवस्था को नये स्वरूप में समाहित करते हुए बनाई गई है। भारतीय शिक्षा पद्धति पर पाचात्य के प्रभाव एवं ग्रामीण एवं शहरी शिक्षा में भेद के विषय पर भी अपने विचार रखे।
प्रभारी कुलपति ने कही ये बात
प्रभारी कुलपति आचार्य अमित सक्सेना ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विश्विद्यालय (Guru Ghasidas Vishwavidayalaya Koni, Bilaspur, (C.G.) की विगत 13 वर्षों की उत्तरोत्तर उन्नति के विषय में बताते हुए यह विश्वास दिलाया की विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रत्येक शिक्षक, अधिकारी व कर्मचारी विश्वविद्यालय (Guru Ghasidas Vishwavidayalaya Koni, Bilaspur, (C.G.) की उत्तरोत्तर प्रगति के लिए दृण संकलपित है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि को आभासी मध्यम से स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मान किया। अंत में प्रभारी कुलसचिव सूरज कुमार मेहर ने सभी उपस्थित एवं आभासी संचार माध्यम से जुड़े हुए विद्वत जनों को धन्यवाद् ज्ञापित किया। कार्यक्रम में कोविड नियमों का पूर्णत: पालन किया गया।
