

- बालिका विद्यालय में साइबर सुरक्षा पर कार्यशाला का आयोजन
लखनऊ , 29 अगस्त 2025 आज के डिजिटल युग में इंटरनेट हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। इसके माध्यम से हम शिक्षा, व्यापार, बैंकिंग, संचार आदि कई क्षेत्रों में कार्य करते हैं। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। इसी को देखते हुए साइबर सुरक्षा की आवश्यकता दिन-ब-दिन महत्वपूर्ण होती जा रही है। साइबर सुरक्षा का अर्थ है कंप्यूटर, मोबाइल, नेटवर्क और डेटा को अनाधिकृत पहुँच, हैकिंग, वायरस, फ़िशिंग और अन्य साइबर हमलों से सुरक्षित रखना। यदि उचित सुरक्षा उपाय न अपनाए जाएँ, तो हमारी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक डिटेल्स और पहचान चोरी हो सकती है, जिससे बड़ा नुकसान हो सकता है। साइबर सुरक्षा के लिए हमें कुछ जरूरी सावधानियाँ बरतनी चाहिए, जैसे मज़बूत पासवर्ड का उपयोग करना, अज्ञात लिंक या ईमेल पर क्लिक न करना, एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर का उपयोग करना और नियमित रूप से अपने सिस्टम को अपडेट करते रहना। सरकार भी विभिन्न कार्यक्रमों और कानूनों के माध्यम से साइबर सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। आम नागरिकों को जागरूक होना और डिजिटल सतर्कता बनाए रखना आज की आवश्यकता है।
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ये जानकारियां बालिका विद्यालय इंटरमीडिएट कॉलेज, मोती नगर, लखनऊ ( Balika Vidyalaya Inter College lucknow ) में आज एन आई आई टी फाऊंडेशन के माध्यम से साइबर सुरक्षा विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग मैनेजर सुश्री अमरीन एवं प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र द्वारा छात्राओं को दी गईं। इस कार्यक्रम का आयोजन पूनम यादव, मंजुला यादव और प्रतिभा रानी के निर्देशन में हुआ। विद्यालय की प्रधानाचार्य डॉ लीना मिश्र ने आमरीन का विद्यालय परिसर में स्वागत किया और छात्राओं से कहा कि वे सभी साइबर के माध्यम से होने वाले आपराधिक मामलों के बारे में अद्यतन जानकारी रखें और अपने एवं अपनों को उसके दुष्प्रभाव से बचाएं।

इस फाउंडेशन का उद्देश्य साइबर सुरक्षा जागरूकता को बढ़ाना, डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन प्राइवेसी और साइबर हाइजीन के प्रति विद्यालय की छात्राओं और युवाओं को जागरूक करना है। इसी विषय को लेकर विद्यालय की छात्राओं को जागरूक करने के लिए उन्हें टोल फ्री नंबर्स के विषय में, पासवर्ड सेटिंग, फिशिंग अटैक, चैट जी पी टी, सोशल नेटवर्किंग साइट्स की कमियों के बारे में विस्तार से बताया जिससे छात्राएं इनके माध्यम से होने वाले आपराधिक मामलों से अपने आपको सुरक्षित रख सकें और स्वस्थ और सुरक्षित जीवन व्यतीत कर सकें। इस कार्यशाला में कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक की लगभग 100 छात्राओं ने प्रतिभाग किया।
