

- कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति बताया कि यह एक आपराधिक मामला है। इससे कई निर्दोष लोगों की जान चली जाती है और मेघावी छात्रों का भविष्य खत्म हो जाता है। इसलिए रैंगिग की घटनों को रोकने के लिए जागरूकता पैदा करना आवश्यक है।
- कार्यक्रम में प्रस्तावित विषय रखते हुए महाविहार के एण्टी-रैंगिग समिति के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार कर्ण ने कहा कि यद्यपि महाविहर रैंगिग मुक्त परिसर है तथापि यह रैगिंक शैक्षणिक परिसर के लिए अभिशाप एवं गंभीर बीमारी जैसी कुप्रथा है। इसलिए जागरूकता और सावधानी ही बचाव है।
नालन्दा , 18 अगस्त , नव नालन्दा महाविहार, नालन्दा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, नई दिल्ली के निर्देश पर दिनांक 12 से 18 अगस्त, 2025 को एण्टी रैगिंग सप्ताह का आयोजन हुआ। इसके अन्तर्गत दिनांक 12 अगस्त, 2025 को एण्टी रैगिंग दिवस ( Anti Ragging ) का शुभारम्भ हुआ।
आज 18 अगस्त, 2025 को अपराह्न 3ः00 बजे नव नालन्दा महाविहार के आचार्य नागार्जुन संकाय भवन के सत्तपण्णी सभागार में एक विषेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। जिसके मुख्य वक्ता डाॅ. अरविंद प्रसाद, मनोविज्ञान विभाग, वी.पी.एस. महाविद्यालय, देशरी, वैशाली रहे। व्याख्यान का विषय – “ रैगिंग के मनोवैज्ञानिक दुष्प्रभाव: वर्तमान कानून एवं दण्ड-व्यवस्था“ है। उन्होंने रैंगिंग और एण्टी-रैगिंक के बारे में बताया, उनके अनुसार रैंगिग खासकर नए छात्रों के साथ उनके वरिष्ठ या साथियों द्वारा किया जाने वाला उत्पीड़न, धमकाना या दुव्र्यहार, जिसे शरीरिक या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना भी कह सकते हैं। इसमें नए छात्रों को अपशब्द बोलना, डराना, धमकाना या पैसों की मांग करना शामिल है। यह साधारणतः पाश्चात्य संस्कृति से आया है। पहले यह चिकित्सक एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों में ज्यादा होता था। जिसके कारण 19वीं शताब्दी में भारत में यह गंभीर रूप ले लिया। जिसके कारण एण्टी-रैंगिग प्रकोष्ठ की स्थापना करनी पड़ी। इसमें रैंगिग को रोकने के लिए बहुत सी कानूनी धाराएं जैसे आई.पी.सी. 506, 509, 306, 307, 323, 342, 354 शामिल हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति बताया कि यह एक आपराधिक मामला है। इससे कई निर्दोष लोगों की जान चली जाती है और मेघावी छात्रों का भविष्य खत्म हो जाता है। इसलिए रैंगिग की घटनों को रोकने के लिए जागरूकता पैदा करना आवश्यक है। उन्होंने अपने परिसर को रैगिंग मुक्त और आदर्ष व्यवहार स्थल रखने के लिए छात्रों से अपील की है।
साथ-ही-साथ दिनांक 13 अगस्त, 2025 को पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता एवं 14 अगस्त, 2025 को दक्षण प्रष्नोत्तरी प्रतियोगिता कराया गया था। उन सभी सफल विद्यार्थियों को कुलपति प्रो. सिद्धार्थ सिंह, डाॅ. अरविंद प्रसाद, मनोविज्ञान विभाग, वी.पी.एस. महाविद्यालय, देषरी, वैषाली एवं प्रो. विजय कुमार कर्ण, अध्यक्ष, एण्टी रैगिंग समिति, नव नालन्दा महाविहार, नालन्दा द्वारा पुरस्कृत किया गया। जिनमें नाम निम्नवत है –
1. पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में सफल विद्यार्थियों प्रथम विजेता नगुयें थी लान, विक्रांत चंचल, द्वितीय विजेता अंकित कुमार, डांग थी हाइप, एवं तृतीय विजेता शिल्पी कुमार और नीरज कुमार हुए.
2. प्रष्नोत्तरी प्रतियोगिता में छः समूह के विजेता के नाम इस प्रकार है – प्रथम विजेता ग्रुप-ए से नित्या राज, स्नेहा कुमारी, सुजाता कुमारी, शबनम कुमारी, आरती कुमारी, द्वितीय विजेता ग्रुप-ई से अमित कुमार, मुन्नू कुमार, डांग थी हाइप, रंजीत कुमार, सपना कुमारी, टरान थाउ ट्रांग, तृतीय विजेता गु्रप-एफ से अंकित कुमार, सुषमा कुमारी, नगु यें थी लानए हुग थी कीम सैंगए अनिमेष साव, पुष्पांजलि कुमारी पुरष्कृत हुए।

कार्यक्रम में प्रस्तावित विषय रखते हुए महाविहार के एण्टी-रैंगिग समिति के अध्यक्ष प्रो. विजय कुमार कर्ण ने कहा कि यद्यपि महाविहर रैंगिग मुक्त परिसर है तथापि यह रैगिंक शैक्षणिक परिसर के लिए अभिशाप एवं गंभीर बीमारी जैसी कुप्रथा है। इसलिए जागरूकता और सावधानी ही बचाव है। सभगार में मुख्य रूप से प्रो. रवीन्द्र नाथ श्रीवास्तव, डाक्टर नरेन्द्र दत्त तिवारी, डाक्टर . पी.के. दास, डाक्टर मुकेश कुमार वर्मा, डाक्टर धम्माज्योति, डाक्टर भीष्म कुमार, डाॅ. के.के. पाण्डेय एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित थे।
