

- लुआक्टा की पूर्व घोषणा के अनुसार आज कालेज शिक्षक लखनऊ विश्वविद्यालय में उपस्थित होकर महाविद्यालयों के शिक्षकों के पीएचडी एवम अन्य अधिकार की कटौती के खिलाफ धरना दे रहे हैं .
- लुआक्टा अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय की अगुवाई में दर्जनों शिक्षकों ने एलयू प्रशासन के शोध अध्यादेश में परिवर्तन के प्रयास का आरोप लगाते हुए विरोध जताया.
- संघठन के अनुसार आज 8 अगस्त 25 को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक के एजेंडे में पी एच डी अध्यादेश 2025 को पारित कराने के प्रस्तुत किया जा रहा है, तथा पुन: महाविद्यालय के स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से बंचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है l
लखनऊ , 08 अगस्त , लखनऊ विश्व विद्यालय सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ के आह्वान पर आज 08 अगस्त को कालेज शिक्षकों ने लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर में धरना शुरू कर दिया है . इनका कहना है कि आज होने वाली लखनऊ विश्व विद्यालय की एकेडमिक काउंसिल की बैठक के एजेंडे में पी एच डी अध्यादेश 2025 को पारित कराने के लिए प्रस्तुत किया जा रहा है, तथा पुन: महाविद्यालय के स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से बंचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है l
लुआक्टा अध्यक्ष मनोज पाण्डेय की घोषणा के अनुरूप आज 8 अगस्त 25 को एकेडमिक कौंसिल की बैठक से पहले ही नये शोध अध्यादेश के खिलाफ, विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले इस कदम का विरोध शुरू हो गया . बड़ी संख्या में शिक्षकों ने धरने शुरू कर दिया है . शिक्षकों से कहा गया था कि अधिक से अधिक संख्या मे उपस्थित होकर महाविद्यालयों के शिक्षकों के पीएचडी एवम अन्य अधिकार की कटौती करने एवम अपना एकाधिकार स्थापित करने की विश्वविद्यालय प्रशासन की नीयत के विरोध मे एकजुटता दिखाएं एवम संगठन को मजबूती प्रदान करें .

लुआक्टा अध्यक्ष मनोज पाण्डेय धरने पर बैठे शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज 8 अगस्त 25 को होने वाली एकेडमिक काउंसिल की बैठक के एजेंडे में पी एच डी अध्यादेश 2025 को पारित कराने के प्रस्तुत किया जा रहा है, तथा पुन: महाविद्यालय के स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से बंचित किये जाने का प्रयास किया जा रहा है l संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन के ऐसे किसी भी निर्णय का विरोध करता है और कल चेतावनी देने के बाद भी एकेडमिक काउंसिल द्वारा ऐसा निर्णय लिये जाने की तैयारी है इसलिए अब संगठन आरपार की लड़ाई लड़ेगा.
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लुआक्टा महामंत्री प्रोफ़ेसर अंशु केडिया ने कहा कि यू जी सी द्वारा शोध के संबंध में 2022 मे रेगुलेशन पारित किया गया था, जिसके आधार पर विश्वविद्यालय द्वारा पिछला शोध अध्यादेश लाया गया था, जिसमे स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया गया था, संगठन द्वारा अवगत कराया गया था कि महाविद्यालय के शिक्षकों को शोध का अधिकार राज्य सरकार द्वारा दिया गया है और विश्वविद्यालय के अधिकार क्षेत्र से परे है विश्वविद्यालय द्वारा विगत वर्ष 31-07-24 को एकेडमिक काउंसिल आहूत बैठक में महाविद्यालय के शिक्षकों को शासन के निर्णय के आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों का शोध अधिकार यथावत रहा l लेकिन पुन: नया अध्यादेश 2025 लाकर विश्वविद्यालय द्वारा महाविद्यालयो के शिक्षकों को उनके अधिकार से वंचित करने की साजिश किया जा रहा, एवं उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है l संगठन इसका विरोध करता है और यह अध्यादेश आज पारित करने की कोशिश की जा रही है इसलिए लुआक्टा द्वारा तत्काल आंदोलन शुरु कर दिया गया है l संगठन द्वारा अपने इस निर्णय से 07 अगस्त को ही कुलपति को अवगत करा दिया गया था l

शिक्षक नेताओं ने सवाल उठाया है कि जब एक बार यू जी सी रेगुलेशन 2022 के आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार प्राप्त हो गया है तो उसी रेगुलेशन के आधार पर दुबारा किस आधार पर स्नातक स्तर के शिक्षकों को शोध अधिकार से वंचित किया जा रहा है l विश्वविद्यालय की इस तानशाही का पूरा विरोध किया जायेगा
