
- हमारे समक्ष अनेक ऐसे पौराणिक और ऐतिहासिक उदाहरण है जो इस गुरु शिष्य की गौरवशाली परंपरा का गुणगान करते हैं ।
10जुलाई , campus samachar.com,
हिंदू जीवन दर्शन में गुरु ( Guru Purnima 2025) का विशेष स्थान है। ललित हीरालाल गर्ग ने बताया कि भगवान से भी श्रेष्ठ भाव हिंदू समाज गुरु को प्रदान करते है। प्रत्येक वर्ष आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा हिंदू समाज द्वारा गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाई जाती है। इसे व्यास पूर्णिमा भी करते हैं क्योंकि आदिगुरु महर्षि वेदव्यास जी ही हैं जिन्होंने अपने समय तक जाने गए समस्त ज्ञान विज्ञान को लिपिबद्ध करके महाभारत जैसा महाकाव्य, भागवत गीता जैसा आदर्श ग्रंथ और पुराण जैसा वैज्ञानिक साहित्य मानव समुदाय को प्रदान किया।
गुरुकुल और गुरु शिष्य परम्परा, ( Guru Purnima 2025) विश्व को भारत की अदभुत देन है–जिसके माध्यम से हजारों लाखों वर्षों से ज्ञान विज्ञान को वाचिक परंपरा के रूप में पीढ़ दर पीढ़ी हस्तांतरित और संरक्षित करने में भारत सफल रहा । भारत की सनातन संस्कृति में गुरु को परम भाव माना गया है जो कभी नष्ट नहीं होता, गुरु कोई व्यक्ति नहीं बल्कि विशुद्ध चेतन तत्व है। जो अज्ञान अंधकार को नष्ट कर, शिष्य को ज्ञान के प्रकाश, विवेक से आलोकित करता है। गुरु कृपा, शिष्य का परम सौभाग्य है।
हमारे समक्ष अनेक ऐसे पौराणिक और ऐतिहासिक उदाहरण है जो इस गुरु शिष्य की गौरवशाली परंपरा का गुणगान करते हैं । आदिगुरु वेदव्यास, गुरु बृहस्पति और देवगण, गुरु शुक्राचार्य और दानवगण, वशिष्ठ विश्वामित्र राम, संदीपनी श्री कृष्णा, परशुराम भीष्म और कर्ण, द्रोणाचार्य पांडव और कौरव, आयोद्धौमय आरुणि, भगवान बुद्ध महावीर, जबाला सत्यकाम, सिख पंथ के नानकदेव अर्जुनदेव, तेगबहादुर, धर्मदास,गोविंद सिंह आदि 10 गुरु, चाणक्य चंद्रगुप्त, समर्थ गुरु रामदास छत्रपति शिवाजी, स्वामी रामानंद कबीर दादू रविदास, रामकृष्ण परमहंस विवेकानंद, भगवान दत्तात्रेय के 24 गुरु, माता पिता प्रकृति प्रत्येक बच्चे के प्रथम गुरु।।
Guru Purnima 2025 : भारतीय संस्कृति की तप, त्याग, समर्पण की अविरत परंपरा:– श्री राम, कृष्ण, शिव, दधीचि, भीष्म, श्रवण कुमार, शिवी, हरिश्चंद्र, राजा दिलीप, पन्नाधाय , रानी पद्मिनी, लक्ष्मी बाई, आरुणि, उपमन्यु, अभिमन्यु, लव कुश ध्रुव, प्रहलाद, सतीसवित्री, अहिल्या, तिलक, सुभाष , सावरकर ,भगत सिंह, चद्र शेखर आजाद, गुरु अर्जुनदेव, तेग बहादुर, गुरु गोविंद सिंह, फतेह जोरावर, खुदीराम बोस आदि अनेकों गुरुओं को नमन करते हुए हिंदू समाज के पुरोधाओं से आग्रह हैं कि इनकी वीरता से अपने बच्चों को अवश्य ही अवगत कराएं।
प्रस्तुति : ललित हीरालाल गर्ग
