

- प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने कहा कि विकसित भारत के लिए तय किए गए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी को किसी ने किसी रूप में सकारात्मक भाव रखना होगा और खुद यह तय करना होगा कि वे विकसित भारत के लिए क्या कुछ कर सकते हैं ?
लखनऊ, 24 जून पावर ग्रिड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया ( Power Grid Corporation of India) के उत्तरी क्षेत्र की ओर से आज 24 जून को उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय लखनऊ में संस्कृति और सभ्यताओं के निर्माण में भाषाओं की भूमिका विषय पर क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया . सम्मेलन में प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण नालंदा बिहार नालंदा ( Nava Nalanda Mahavihara) बिहार , CDRI लखनऊ के पूर्व राजभाषा अधिकारी डॉ विजय नारायण तिवारी और लखनऊ विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के प्राध्यापक सूरज बहादुर थापा मुख्य रूप से उपस्थित थे . सम्मेलन का विषय संस्कृत भाषा था और इस विषय पर विद्वान वक्ताओं ने अपने-अपने विचार व्यक्त किया . कार्यक्रम में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन आफ इंडिया ( Power Grid Corporation of India ) के क्षेत्रीय निदेशक वाई के दीक्षित व अन्य अधिकारियों ने प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण को अंगवस्त्रम व प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया.

अवध विहार स्थित उत्तर क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने भारतीय संस्कृति के उत्थान और सतत विकास पर ओजस्वी व्याख्यान दिया . उन्होंने कहा कि किसी भी देश की राष्ट्रभाषा ही वहां के विकास का आधार विकास की आधारशिला तय करती है . उन्होंने चीन और तुर्की का उदाहरण प्रस्तुत किया जबकि भारत के संदर्भ में कहा कि 1947 में देश के आजाद होने के बाद भी राष्ट्रभाषा के लिए मानक बिंदु तय करने में लगभग डेढ़ दशक विलंब किया गया .

उन्होंने कहा कि आमतौर पर समझा जाता है कि चीन में केवल एक ही भाषा है , जबकि वास्तविकता यह है की चीन में लगभग 60 भाषाएं हैं, लेकिन वहां प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी मातृभाषा मदारिन में ही पढ़ाई आगे जारी करनी पड़ती है और चीन में सभी प्रकार के शोध, साहित्यिक गतिविधियां, उच्च साहित्य मंदारिन भाषा में ही उपलब्ध है. जबकि भारत में ऐसी स्थिति नहीं है और विद्यार्थियों का बहुत अधिक समय अनुवाद में लगता है . उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए तय किए गए लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी को किसी ने किसी रूप में सकारात्मक भाव रखना होगा और खुद यह तय करना होगा कि वे विकसित भारत के लिए क्या कुछ कर सकते हैं ?

प्रख्यात संस्कृत विद्वान प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने कहा कि यह समय आलोचनाओं या सवाल खड़ा करने का नहीं है, बल्कि एक दीपक की तरह रोशनी करके विकसित भारत की आधारशिला और विकास के पथ को अवलोकिता करने का है . उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों का आह्वान किया कि वे खुद आत्मावलोकन करें और स्वयं तय करें कि वे राष्ट्र के विकास में किस प्रकार की भूमिका निभा सकते हैं ? उन्होंने कहा प्राचीन भारतीय ग्रंथों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कोई भी व्यक्ति अनुपयोगी नहीं है बल्कि उसके लिए एक रचनाकार की जरूरत होती है . अपने सारगर्भित भाषण में प्रोफेसर विजय कर्ण ने देश की संस्कृति, देश के साहित्य, देश की स्वतंत्रता और देश को परम वैभव तक पहुंचने से जुड़े विभिन्न पहलुओं का विस्तार से वर्णन किया . उन्होंने सम्मेलन में उपस्थित अधिकारियों से सीधा संवाद करते हुए कहा कि अब यह समय आगे बढ़ने का, उन्नति करने का है इसलिए सामान्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के बजाय सीधे देश की उन्नति की ओर अग्रसर होना चाहिए.
कार्यक्रम का संचालन देवी प्रियंका सिंह ने किया . कार्यक्रम में शाम को कबीर वाणी सह काव्य संध्या का भी आयोजन किया गया .
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