

- जिंदगी ना मिलेगी दुबारा सेवा संस्था का आभार व्यक्त करते हुए ललित हीरालाल गर्ग ने बताया कि आग्रह व्रत अभियान पिछले 10 वर्षों से इस समस्या के समाधान पर कार्य कर रहा है।
- ललित हीरालाल गर्ग, दीपक कश्यप, विवेक बर्वे, करूणा सागर पंडा, आशीष अग्रवाल, हर्षित रस्तोगी आदि आग्रह व्रतियों ने अभियान की ओर से इस सम्मान को स्वीकार किया।
रायपुर , 20 जून, campus samachar.com, 100% हिंदुओं के निरापद हिंदु राष्ट्र हेतु कृतसंकल्पित आग्रहव्रत अभियान को आज छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में जिंदगी ना मिलेगी दुबारा सेवा संस्था के द्वारा वरिष्ठ सासंद बृजमोहन अग्रवाल, पूर्वमहापौर श्री प्रमोद दुबे, समाजवादी नेता रघु ठाकुर व वरिष्ठ पत्रकार प्रभात मिश्रा के हस्ते प्रदान किया गया। आग्रहव्रत अभियान के कोई पदाधिकारी नहीं होते हैं। अतः ललित हीरालाल गर्ग, दीपक कश्यप, विवेक बर्वे, करूणा सागर पंडा, आशीष अग्रवाल, हर्षित रस्तोगी आदि आग्रह व्रतियों ने अभियान की ओर से इस सम्मान को स्वीकार किया। इससे यह स्वतः ही स्पष्ट हो रहा हैं कि निरापद हिंदू राष्ट्र बनाने का जो स्वप्न अभियान के प्रणेता श्री सुनील गंगाराम गर्ग ने देखा था, उसे ना समाज के विभिन्न वर्गो द्वारा स्वीकृत किया जा रहा हैं, अपितु सम्मानित भी किया जा रहा हैं।
जिंदगी ना मिलेगी दुबारा सेवा संस्था का आभार व्यक्त करते हुए ललित हीरालाल गर्ग ने बताया कि आग्रह व्रत अभियान पिछले 10 वर्षों से इस समस्या के समाधान पर कार्य कर रहा है। अब तक देश भर से 10,000 स्वप्नदृष्टा हिन्दू इस अभियान के साथ जुड़कर इन संकटों से देश को मुक्त करवाने हेतु परिश्रम कर रहे हैं। ये व्रती विलुप्त प्रायः हिंदू काल गणना को हिंदू दैनंदिनी के द्वारा पुर्नजीवित करने के अतिरिक्त अन्य हिन्दुओं को समाधान के प्रति जागरूक करने और उनको इस अभियान से जोड़ने के लिए कृतसंकल्पित हैं, ताकि माँ भारती का वैभव सदा कायम रहे।
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हिन्दूओं के घटते अनुपात से भारत के समक्ष अपनी संस्कृति, संस्कार, नारी सम्मान, लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाये रखना कठिन होते जा रहा हैं। विविधतावाद एक विचारधारा है जो मानती है कि सभी व्यक्ति भिन्न-भिन्न प्रकारों से भिन्न हैं, फिर भी सभी व्यक्ति एक दूसरे के प्रति सद्भाव और परस्पर सम्मान के साथ एक साथ रह सकते हैं।
विविधता के प्रति ऐसी स्वीकार्यता ही विश्व शांति और समृद्धि की कुंजी है। बहुदेववाद विविधतावाद का एक स्वाभाविक परिणाम है। भारतीय संदर्भ में, सभी हिन्दू पंथ बहुदेववादी हैं जबकि अ-हिन्दू पंथ अधिकतर एकेश्वरवादी पंथ हैं। इसके अलावा, दो प्रमुख एकेश्वरवादी पंथ अर्थात् ईसाईयत और इस्लाम अपनी विचारधारा के मूल में ही विस्तारवादी हैं। उनका यह विस्तारवादी और एकेश्वरवादी स्वभाव सम्पूर्ण समाज में संघर्ष का कारण बनता रहता है।

उन्होंने स्थिति को ऐसी जटिलता में ला खड़ा किया है कि भारत के मूल समाज अर्थात् हिन्दू समाज का अस्तित्व ही संकट में पड़ रहा है। भारत की आजादी से लेकर अभी तक लगातार हिंदुओ की जनसँख्या के अनुपात में कमी होना चिंतनीय हैं। उन्होंने बताया कि एक और कान्वेंट व अंग्रेजी शिक्षित हिंदू अपनी संस्कृति, संस्कार व आचरण भूलकर आधुनिकता के चक्कर मे पाश्चात सभ्यता का अंधानुकरण कर रहे है। दूसरी और जाति, वर्ग में उलझकर मूल संस्कृति से दूर हो रहे हैं। जबकि हमारे पूर्वज सर्वे भवंतु सुखिनः के साथ सबको साथ लेकर चलते थे।

आज भारत मे रहने वाले प्रत्येक ईसाई व मुसलमान वास्तव में हमारे उन बिछड़े हुए पूर्वजों की ही संतान हैं, जिन्होंने मजबूरीवश भय या लालच से धर्म परिवर्तित किया था। दुर्भाग्यपूर्ण यह हैं कि हमनें कभी भी उन बिछड़े भाइयों को सच्चाई से अवगत ही नहीं कराया। अब समय आ गया हैं कि भारत के अस्तित्व को बचाये रखने हेतु जाति भेद मिटाते हुए उन्हें विदेशी नियंत्रण से मुक्त कराने तथा देश की मूलधारा में लाने हेतु हमें स्वीकार्यता बढ़ानी होगी।
आज के सम्मान में बिलासपुर से ललित हीरालाल गर्ग, मुंगेली से रामकिंकर सिंह, नागपुर से दीपक कश्यप, रायपुर से करुणा सागर पंडा, विवेक बर्वे, आशीष अग्रवाल, हर्षित रस्तोगी सहित बड़ी सँख्या में जागरूक नागरिक उपस्थित हुए।
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