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लगातार बढ़ रहे न्यायालयों में तदर्थ शिक्षकों के मामले, सरकारी राज कोष पर बढ़ रहा अनावश्यक् सरकारी खर्चे का दबाव – पांडेय गुट - पांडेय गुट ने उठाई न्यायालय के समस्त खर्चे को संबंधित शिक्षा अधिकारियों से ही वसूल करने की माँग, लगातार बढ़ रहे शिक्षा विभाग के विभिन्न स्तर के अदालतों में तदर्थ शिक्षकों के मामले , योगी सरकार तत्काल करे हस्तक्षेप
- तदर्थ शिक्षकों को नियमित कर तदर्थ वाद समाप्त करे योगी सरकार – डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल
- विनियमितीकरणं मामले में मंडलीय समितियों द्वारा शासन एवं सरकार को गुमराह किया जा रहा है -ओम प्रकाश त्रिपाठी
लखनऊ, 03 जून, campussamachar.com, प्रदेश के गैर सरकारी माध्यमिक शिक्षण संस्थानों में विगत पच्चीस जनवरी 1999 व तीस दिसंबर दो हजार तक क्रमश कठिनाई निवारण अधिनियम व चयन बोर्ड अधिनियम की धारा 18 के अंतर्गत नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को विनियमित किये जाने मे मंडलीय समितियों द्वारा मनमानी ढंग से व्याख्या कर मामले मे शासन को गुमराह किया जा रहा ह।

उ प्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने इस रोजी रोटी से जुड़े मामले की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ( Uttar Pradesh Chief Minister Yogi Adityanath) , से तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग को दोहराया है।
संघ के प्रादेशिक अध्यक्ष डॉ जितेंद्र कुमार सिंह पटेल एवं सगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने आज यहाँ जारी अपने बयान मे कहा कि मंडलीय अधिकारीगण नियमानुसार वर्ष दो हजार तक के नियुक्त शिक्षकों को विनियमित करने के बजाय दो हजार के पश्चात प्रबंध समितियों द्वारा की गयी नियुक्ति यो को एक साथ जोड़ कर देखा जा रहा है। यह सरासर गलत है।
इसके चलते ही अधिकारीगण कोर्ट को भी गलत तथ्यों को प्रस्तुत कर गुमराह किया जा रहा है। इस मामले में कोर्ट का साफ तौर पर स्पष्ट रूप से मानना है कि दो हजार के बाद की नियुक्तियों पर केवल रोक लगाई गई है और वेतन दिये जाने से मना किया गया है। इसे दो हजार के पूर्व के तदर्थ शिक्षकों पर लागू किया जाना जहा एक ओर उनके साथ अन्याय तो है ही वही दूसरी ओर कोर्ट के आदेशों की खुली अवहेलना के साथ साथ अवमान ना भी है।

शिक्षक नेताओ ने इस मामले मे अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार एवं महा निदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा जी का व्यक्तिगत ध्यान आकर्षित किया है और उनसे मामलो की समीक्षा कर सरकार एवं शासन की मंशा के अनुसार वर्ष दो हजार तक के नियमानुसार नियुक्त सभी तदर्थ शिक्षकों को विना भेद भाव के विनियमित करने व अवरुद्ध वेतन भुगतान कर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा जगत से तदर्थ वाद को समाप्त करने की माँग की हैं।
