

- मुख्य अतिथि रजनेश सिंह वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर ने योग को जीवन में अनुशासन, संयम और शांति का स्तंभ बताया।
बिलासपुर , 19 अप्रैल 2025 , campussamachar.com“दैनिक जीवन में योग” पर विमर्श और कश्मीर सानिध्य की स्मृतियों का पुनर्जागरण विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, शाखा बिलासपुर द्वारा सिम्स ऑडिटोरियम में कार्यक्रम का आयोजन किया गया . विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी की बिलासपुर शाखा द्वारा “दैनिक जीवन में योग” विषय पर एक प्रेरक विमर्श का आयोजन छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स) के भव्य ऑडिटोरियम में किया गया। यह आयोजन योग, संस्कृति और सेवा के समन्वय का जीवंत उदाहरण बना।
कार्यक्रम के प्रमुख वक्ता हनुमंत राव , अखिल भारतीय राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी ने योग के व्यापक आयामों को सरल शब्दों में समझाया। उन्होंने कहा, “निअहंकार रहित, निषंग भाव से किया गया कर्म ही कर्मयोग बन जाता है। यदि कुछ विशेष नहीं कर सकते, तो धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों से जुड़कर तन और मन को जोड़ें तथा थोड़ा समय समर्पित करें — इससे सतगुण, सत्विचार और चेतना स्वतः जाग्रत होगी।”
मुख्य अतिथि के रूप में रजनेश सिंह जी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, बिलासपुर उपस्थित रहे, जिन्होंने योग को जीवन में अनुशासन, संयम और शांति का स्तंभ बताया। अध्यक्षता प्रतीक शर्मा , वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा की गई, जिन्होंने योग को भारतीय जीवन दृष्टि का अभिन्न हिस्सा बताया।
विशिष्ट सहभागिता श्री घनश्याम तिवारी जी, प्रदेश संयोजक, पैक्स प्रकोष्ठ, सहकार भारती, छत्तीसगढ़ द्वारा की गई, जिन्होंने ग्रामीण भारत में योग और अध्यात्म की महत्ता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में बिलासपुर शहर के नागरिकों, युवाओं, विद्यार्थियों, चिकित्सकों, अधिवक्ताओं तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। विमर्श के दौरान योग की दैनिक जीवन में उपयोगिता और उसके आत्मिक, मानसिक तथा सामाजिक लाभों पर गंभीर चर्चा हुई।
व्यक्तिगत अनुभूति:
एक स्मृति की पुनरावृत्ति
इस अवसर पर सहभागी होने का मुझे विशेष आनंद इसलिए भी हुआ क्योंकि इस आयोजन में पुनः हनुमंत राव जी से साक्षात मिलना मेरे लिए 2018 के उन स्मरणीय पलों को जीवंत कर गया, जब मैं कश्मीर के अन्नतनाग जिले के नागदंडी में विवेकानंद केंद्र द्वारा आयोजित दस दिवसीय सानिध्य शिविर का सहभागी था। उस समय उनके स्नेहिल मार्गदर्शन और गहन आध्यात्मिक ऊर्जा ने जो प्रभाव डाला था, वह आज भी मेरे जीवन में पथप्रदर्शक है। यह कार्यक्रम न केवल एक विचार विमर्श था, बल्कि आत्मचिंतन और आत्मविकास की ओर उठाया गया एक सार्थक कदम भी था।
