
- इस एक घंटे के विशेष पॉडकास्ट को सात प्रमुख खंडों में बांटा गया, जिसमें कैंसर की परिभाषा, कारण, लक्षण, निदान, बचाव के तरीके, उपचार और जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका पर गहराई से चर्चा की गई।
बिलासपुर, 22 मार्च 2025,, campussamachar.com, अटल बिहारी वाजपेयी ट्रस्ट – ABHAV फाउंडेशन द्वारा “स्त्री रोग संबंधी कैंसर: जोखिम कारक और शुरुआती लक्षण” विषय पर एक विशेष यूट्यूब लाइव पॉडकास्ट का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने और स्त्री रोग संबंधी कैंसर के बारे में सही जानकारी देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
इस महत्वपूर्ण सत्र में प्रसिद्ध गाइनी ऑनको सर्जन डॉ. सरिता कुमारी दिल्ली ने गर्भाशय, डिम्बग्रंथि (ओवरी), गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), योनि और वल्वा कैंसर के जोखिम, शुरुआती लक्षण, रोकथाम और उपचार पर विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन दिल्ली की युवा यूट्यूबर आद्या सिंह ने किया।
इस लाइव सत्र में देशभर से 215 लोगों ने सहभागिता दर्ज कराई, जिनमें स्वास्थ्य विशेषज्ञ, डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल थे।
पॉडकास्ट के प्रमुख विषय और विस्तृत चर्चा
इस एक घंटे के विशेष पॉडकास्ट को सात प्रमुख खंडों में बांटा गया, जिसमें कैंसर की परिभाषा, कारण, लक्षण, निदान, बचाव के तरीके, उपचार और जागरूकता कार्यक्रमों की भूमिका पर गहराई से चर्चा की गई।
स्त्री रोग संबंधी कैंसर का परिचय
स्त्री रोग संबंधी कैंसर वे कैंसर होते हैं जो महिलाओं के प्रजनन अंगों को प्रभावित करते हैं। इनमें गर्भाशय (यूटेरस), डिम्बग्रंथि (ओवरी), गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स), योनि (वैजाइना) और वल्वा (बाहरी जननांग) के कैंसर शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लगभग 6 लाख महिलाओं को स्त्री रोग संबंधी कैंसर का पता चलता है। भारत में, सबसे अधिक मामले सर्वाइकल कैंसर और ओवेरियन कैंसर के देखे जाते हैं।
डॉ. सरिता ने बताया कि महिलाओं में कैंसर को लेकर कई मिथक प्रचलित हैं, जैसे
केवल बुजुर्ग महिलाओं को यह कैंसर होता है
यदि कोई लक्षण नहीं है तो चिंता की बात नहीं
HPV वैक्सीन पूरी तरह से कैंसर से बचा सकती है
स्त्री रोग संबंधी कैंसर के जोखिम कारक और कारण
प्रमुख जोखिम कारकों में अनुवांशिकता, अस्वस्थ खानपान, मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन और एचपीवी संक्रमण शामिल हैं।
नियमित व्यायाम और स्वस्थ आहार से इन कैंसरों का खतरा कम किया जा सकता है। HPV वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर के खतरे को 90 प्रतिशत तक कम कर सकती है और इसे 9 से 26 वर्ष की उम्र की महिलाओं को दिया जा सकता है।
स्त्री रोग संबंधी कैंसर के शुरुआती लक्षण और पहचान
प्रमुख लक्षणों में असामान्य रक्तस्राव, पेट में सूजन, लगातार गैस, अपच, योनि से दुर्गंधयुक्त स्राव और संभोग के दौरान दर्द शामिल हैं।
यदि ये लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
स्क्रीनिंग और निदान
पैप स्मीयर टेस्ट, एचपीवी टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें उपलब्ध हैं, जो शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान करने में मदद करती हैं। 30 साल की उम्र के बाद हर 3 साल में पैप स्मीयर टेस्ट कराना जरूरी है।
बचाव और रोकथाम
स्त्री रोग संबंधी कैंसर से बचने के लिए स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और धूम्रपान व शराब से परहेज जरूरी है। जागरूकता अभियान और हेल्थ चेकअप प्रोग्राम ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद आवश्यक हैं।
उपचार और नई चिकित्सा पद्धतियां
उपचार के रूप में सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी जैसी विधियां उपलब्ध हैं। आधुनिक चिकित्सा में रोबोटिक सर्जरी और टार्गेटेड थेरेपी से इलाज के नए द्वार खुले हैं।
विशेषज्ञ का संदेश और निष्कर्ष
डॉ. सरिता कुमारी दिल्ली ने कहा कि महिलाओं को अपने शरीर के संकेतों को समझना चाहिए और नियमित जांच करानी चाहिए। कैंसर का जल्दी पता लगने से इलाज संभव है। इस सत्र का संचालन आद्या सिंह दिल्ली ने किया। यह जानकारी जीपी तिवारी, अध्यक्ष, अटल बिहारी वाजपेई ट्रस्ट बिलासपुर छत्तीसगढ़ ने दी है .
