
“बासोड़ा” पर्व
होली के बाद पहले सोमवार या सातवे/आठवें दिन एक त्यौहार आता हैं जिसे शीतला सप्तमी/अष्टमी अथवा बासोड़ा कहते हैं। इस दिन ठण्डा भोजन (बासी भोजन) खाया जाता हैं । शुभमविहार निवासी श्रीमती निशा ललित अग्रवाल अपनी पुत्रवधुये श्रीमती मोनिका निलेश अग्रवाल, श्रीमती रानू मयंक अग्रवाल पौत्र रुद्रांश गर्ग, कृष्ण गर्ग सहित पूरे परिवार के साथ आज शीतला माता की पूजा अर्चना कर कल का बनाया हुआ खाद्यप्रदार्थ भेंट कर स्वयं व परिजनों को खिलाने की अनुमति ली। इस अवसर पर ललित अग्रवाल ने बताया कि सम्पूर्ण विश्व में कई धर्म सम्प्रदाय हैं । एक हमारा हिन्दू धर्म ही हैं जिसमें 18654 (अक्षरी अट्ठारह हजार छः सौ चौवन) रीति रिवाज हैं तथा 159 ( एक सौ उनसठ ) तीज त्यौहार हैं ।
तथा हमारे धर्म में जो भी तीज त्यौहार हैं उनका वैज्ञानिक महत्व रहता हैं । वह हमारे ऋषियों के शोधकार्य तथा हमारे शुभचिंतन का परिणाम होता हैं । इस दिन कोई भी गर्म वस्तु चाय, धूम्रपान तक वर्जित रहता हैं । महिलाए बासोड़ा से पहले रात में भोजन बना कर रख लेती हैं तथा अगले दिन शाम तक इसी भोजन को परोसती हैं । कुछ चतुर महिलाएं सुबह दोपहर एवम् शाम का भोजन अलग अलग बना कर रख लेती हैं । जिससे परिजनों को असुविधा न हो ।
1968 में अमेरिकन रिपोर्टर में एक शोध का निष्कर्ष था कि जर्मनी में एक शोध संस्थान में बासोड़ा के भोजन का एब्सट्रैक्ट निकाला गया तो स्माल पाक्स का वैक्सीन तैयार हो गया था । तमाम वैज्ञानिक आश्चर्यचकित थे , भारतीय भोजन की उत्कृष्ट उपयोगिता के लिए ।
तद्नन्तर 2002 में जब बासोड़ा के भोजन के एक एक व्यञ्जन पर काम किया तो चार तथ्य सामने में आएं ।
१.चावल
२.गुड़
३.दही तथा
४.रात भर भीगी हुई चने की दाल ।
बासोड़ा के भोजन में मुख्यतः ये चीजें बनाई जाती हैं
पूरी , पराठा , सब्जी, मठरी, शक्कर पारा, गुलगुले , भजिए
गुड़ अथवा गन्ने के रस में पकाया हुआ चावल दही एवम् चने की भीगी हुई दाल जिसे पकाया नहीं जाता कच्ची खाई जाती हैं ।
यदि होली के पश्चात बासोड़ा को गुड़ में पका चावल एक कटोरी , दही एक कटोरी , तथा एक कटोरी चने की भीगी दाल ( तीनों को मिलाकर लगभग २५० ग्राम) इन तीनों को मिला कर खा लिया जाएं तथा २४ घण्टे तक आपके पेट में कोई भी गर्म पेय अथवा गरम खाद्यपदार्थ न जाने पाए तो ऐसे विशिष्ट बैक्टीरिया का उत्पादन हो जाता हैं जो एण्टीबाडीज का काम करते हैं तथा पूरे वर्ष भर आप सभी प्रकार के हानिकारक वायरस से सुरक्षित हो जाते हैं तथा किसी भी प्रकार का चर्मरोग, लीवर, किडनी, इन्फेक्शन नहीं होता।इसलिए अपने हित के लिए कम से कम एक दिन तो ठण्डा भोजन खा ही सकते हैं, कोई अनर्थ नहीं हो जाएगा ।
