

कोरबा , 04 मार्च , campussamachar.com, छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा द्वारा विश्व वन्यजीव दिवस के अवसर पर शासकीय हाई स्कूल स्याहीमुड़ी में आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुधार के बारे में जागरूकता फैलाना था। इस कार्यक्रम में, महुआ बिनने वालों को आग लगाकर महुआ इकट्ठा करने से मना किया गया और उन्हें समझाया गया कि कैसे बिना आग लगाए महुआ एकत्र किया जा सकता है। जंगल मे पिकनिक मानाने जाने पर कचरा नहीं फैलाना चाहिए और साथ ही जंगलों में पॉलिथीन या कचरे को नहीं फेंकना चाहिए। जंगल में जानबूझकर आग लगाने वालों को समझना चाहिए कि उनके इस कृत्य से कितना नुकसान होता है ।
विज्ञान सभा की संयुक्त सचिव निधि सिंह द्वारा बताया गया कि हाथी प्रभावित क्षेत्र होने के कारण स्थानीय लोगों से अपील की गई कि वे हाथियों से संबंधित सूचना तत्काल रूप से वन विभाग को दें। साथ ही, वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत, जन सामान्य को समझाया गया कि किसी भी वन्य जीव को बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए, न ही जीव-जंतुओं का शिकार किया जाना चाहिए। क्योंकि वन्यजीवों को बंदी बनाकर रखना ओर उनका शिकार करना अपराध की श्रेणी में आता है ।उन्होंने अंब्रेला स्पीशीज जैसे टाइगर इंडिकेटर प्रजातियां विलुप्तप्राय श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत होने वाले वन्य जीवों के विषय में बच्चों को जानकारी दी ।संस्था की प्राचार्य डॉ फरहाना अली ने बच्चों को समझाया कि खाद्य श्रृंखला का क्या महत्व होता है और किस लिए प्रत्येक जीव महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार एक छोटे से छोटा कीट भी पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। छात्र-छात्राओं से अपील की गई कि वे अपनी छतों पर मिट्टी के बर्तनों में पक्षियों के लिए पानी रखें जिससे इस गर्मी में जीवो को पानी मिल सके। छात्रों ने प्रण किया कि वह मिलजुल कर अपने आसपास के पर्यावरण को संरक्षित करने में सहयोग करेंगे और वन्य जीव जंतुओं से संबंधित सूचना को तत्काल रूप से वन विभाग के साथ साझा करेंगे।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा के सदस्यों के साथ-साथ व्याख्याता सरोजिनी उईके, पुष्पा बघेल , मोनिका शर्मा ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह कार्यक्रम वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
