
लखनऊ, 24 फरवरी,campus samachar.com, लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ के छात्रसंघ भवन की कैंटीन वाले पंडित जी अब नहीं रहे। लखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के पूर्व महामंत्री एवं सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के सहायक कुलसचिव विनायक धर दुबे के पूज्य पिता जी जो लविवि में कैन्टीन वाले पंडितजी के नाम से मशहूर थे, आज 24 फरवरी की सुबह हृदयाघात से गोलोकगमन कर गए। उनके निधन का दुखद समाचार मिलते ही लखनऊ विश्वविद्यालय लखनऊ में उनके नए पुराने समर्थकों और परिचितों में शोक की लहर फ़ैल गई। पंडित जी के नाम से मशहूर दुबे जी के दुखद निधन के समाचार ने लखनऊ विश्वविद्यालय के 80 के दशक की छात्र राजनीति ताजा कर दी।
1977 के आपातकाल के बाद लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष 1985 से फिर छात्रसंघ चुनाव शुरू हुए और तब कुंवर रामवीर सिंह छात्रसंघ के अध्यक्ष चुने गए . इसके बाद सरोज तिवारी, समर पाल सिंह जैसे तमाम दिग्गज छात्रनेता एक एक कर अध्यक्ष की कुर्सी संभालते रहे लेकिन लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ की राजनीति का केंद्र बिंदु पंडित जी की कैंटीन मुख्य रूप से हुआ करती थी .
छात्र नेताओं और उनके समर्थकों के लिए चाय- पानी का इंतजाम इसी कैंटीन से होता था, जो छात्र संघ पदाधिकारी बनते थे , उनके समर्थकों को छात्र संघ पदाधिकारी के कक्ष में ही चाय समोसा और नाश्ते नाश्ता उपलब्ध कराया जाता था जबकि छात्र नेता पंडित जी की कैंटीन में या फिर बाहर छात्रसंघ भवन के लान में बैठकर चाय पीते थे. चाय नाश्ते के बाद पुनः कैंपस में अपने-अपने समर्थकों के साथ घूमते, उनके काम कराते और अगले छात्र संघ चुनाव के लिए अपने को मजबूती प्रदान करते . किसी को मिलने की जगह बतानी हो तो पंडित जी की कंटीन ही ठिकाना होती थी .
यह सिलसिला दशकों तक चला और इस छात्र राजनीति में ऐसा भी समय आया जब अपराधीकरण का दौर शुरू हुआ इसी अपराधीकरण में लखनऊ विश्वविद्यालय के कई छात्र नेताओं की हत्या हुई और कई छात्र नेता खुद को बचाते हुए माफिया की शक्ल में बड़े छात्रनेता के रूप में उभरे और आज भी उनका पुराना रुतबा ही राजनीति में काम आ रहा है. राजनीति के इस विषम दौर में भी पंडित जी की कैंटीन पर कभी आंच नहीं आई और न ही किसी छात्र नेता ने उन्हें परेशान करने की कोशिश की . सभी आदर भाव से पंडित जी को सम्मान देते और पंडित जी भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार उनकी हर तरह की मदद करते . छात्र नेताओं के चुनाव लड़ने के समय कैंटीन के स्टाफ भी उनकी हर संभव मदद करते , चाहे पोस्टर लगाने की बात हो या फिर बैनर टांगने की .
वर्तमान छात्र राजनीति और 90 के दशक से निकले छात्र नेताओं के नाम का उल्लेख करना उचित नहीं होगा, लेकिन छात्र संघ चुनाव और लखनऊ विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति का वह दौर कठिन था अब देखे तो छात्र संघ चुनाव बंद होने के बाद उस तरह की समझ सोच और छात्रों की आवाज, शिक्षा में सुधार की बात करने वाले छात्र नेताओं की कमी जरूर हो गई है। आज पंडित जी के दुखद निधन का समाचार विश्वविद्यालय परिसर से जुड़े लोगों के लिए पीड़ा दायक है . उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
पंडित जी के आकस्मिक निधन परलखनऊ विश्वविद्यालय कर्मचारी परिषद के अध्यक्ष राकेश यादव, महामंत्री डॉक्टर संजय शुक्ला, छात्रसंघ पूर्व महामंत्री अनिल सिंह वीरू, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ( NSUI ) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रेहान अहमद सुबह श्रीवास्तव, NSUI के पूर्व प्रादेशिक महासचिव (प्रशासन) अजय कुमार शर्मा अज्जू , समाजसेवी आकाश चोपड़ा, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष और प्रवक्ता डॉ आर पी मिश्र, प्रदेशीय मंत्री डॉक्टर आरके त्रिवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालय डिग्री कॉलेज शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय, महामंत्री डॉ अंशु केडिया , शासकीय अधिवक्ता युगल किशोर पांडे दाऊ जी , राजस्थान पत्रिका के पूर्व स्थानीय संपादक शिव सिंह, भाजपा विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक प्रशांत सिंह अटल एडवोकेट सहित बड़ी संख्या में लोगों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की है।
