
लखनऊ 6 नवंबर। campussamachar.com, लखनऊ विश्वविद्यालय संयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा ) के तेवर जब – तब लखनऊ विश्वविद्यालय ( Lucknow University ) के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय के लिए सिर दर्द साबित हो रहे हैं । या यूं कहें कि लुआक्टा के पदाधिकारियों के तेवरों से लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन को बैक फुट पर होना पड़ रहा है ।
lusu news : सबसे ताजा मामला लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव बहाली को लेकर चल रहे आंदोलन में लुआक्टा के नेताओं द्वारा समर्थन देने का है लुआक्टा ने छात्र आंदोलन का समर्थन करते हुए राज्यपाल को पत्र लिखकर इसमें हस्तक्षेप करने की मांग भी कर डाली। अब लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए यह बहुत जरूरी था कि राज्यपाल का हस्तक्षेप करने से पहले इस मामले को जैसे तैसे हल किया जाए। शायद यही कारण था कि लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारियों पूर्व अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव व पूर्व महामंत्री अनिल सिंह वीरू आदि ने जैसे ही कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय से मुलाकात कर इस आंदोलन की मांगों को लेकर चर्चा की तो विश्वविद्यालय प्रशासन को एक बेहतर रास्ता दिखाई दिया और कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय सीधे लखनऊ विश्वविद्यालय परिसर स्थित आंदोलन स्थल पर जमे छात्र छात्रों के बीच जा पहुंचे।
latest lu news : कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय और आंदोलित छात्रनेताओं के बीच आपसी बातचीत और सहमति के बाद छात्र नेताओं ने कुलपति के हाथों जूस पिया और उनके आश्वासन पर आंदोलन को खत्म कर दिया। यह लुआक्टा के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडे और महामंत्री अंशु केडिया द्वारा राज्यपाल /कुलाधिपति को भेजे गए पत्र का ही असर माना जा रहा है कि पिछले 20 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन को अनदेखा सा करने वाला विश्वविद्यालय प्रशासन अचानक सक्रिय होकर न केवल छात्र आंदोलन स्थल पर कुलपति पहुंचे बल्कि उनकी मांगों से भी सहमति जताते हुए आंदोलन खत्म करने की अपील कर डाली ।
lucknow educatio news : इसके पहले विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्र आंदोलन के प्रति अपनाया जा रहे अड़ियल रवैया को हाल के दिनों में तब देखा गया था जब विश्वविद्यालय परिसर में पुलिस ने एक-एक छात्र नेता को उठाकर गिरफ्तार कर लिया था लेकिन लुआक्टा के इस तेवरों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने गिरफ्तारी वाली गलती दोहराने के बजाय छात्रों के बीच जाकर सम्मानजनक तरीके से उनके आंदोलन का समापन करवा दिया है। यह पहला मौका नहीं है जब लुआक्टा विश्वविद्यालय प्रशासन को बैकफुट पर ला चुका है । इसके पहले भी शिक्षकों के प्रमोशन से लेकर वेतन भुगतानम, प्रवेश के समय विद्यार्थियों से लखनऊ यूनिवर्सिटी रजिस्ट्रेशन नंबर (LURN) तक के मामले में भी विश्वविद्यालय को आइना दिखा चुका है। लोफर के अध्यक्ष प्रोफेसर मनोज पांडे और महामंत्री अंशु केडिया की लगातार सक्रियता से भी विश्वविद्यालय के उन शिक्षक नेताओं को परेशानी भी होती है, जिन्होंने शिक्षकों के हितों की लड़ाई लड़ने के नाम पर चुनाव जीता है।
