
पुस्तक- कहानी अरपा की
लेखकद्वय , डा पी एल चंद्राकर, दीपक चंद्राकर
समीक्षा -डा गिरधारी अग्रवाल

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शैक्षिक संस्थान CMD PG college bilaspur के प्रोफेसर और प्रसिद्ध भुगोलविद डा चंद्राकर जी ने बिलासपुर शहर की जीवन रेखा अरपा नदी पर ” कहानी अरपा की ” लिखकर हमें इसके उद्गम, महत्व और शिवनाथ नदी में विलय की संपूर्ण यात्रा घर बैठे ही उपलब्ध करा दी है।
पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व की मेकल पर्वत जो प्राकृतिक रूप से शिवलिंग स्वरूप है। इसका हवाई सर्वेक्षण करने पर ज्ञात होता है कि यह मेकल पर्वत साक्षात शिवलिंग के ही स्वरूप में स्थित है। बीच में स्वंभू शिवलिंग प्रतीक रूप में स्थित है और इसके चारों तरफ निर्मित सड़क मार्ग उसकी जलहरी बनाती हुई प्रतीत होती है। इस प्रकार यह मेकल पर्वत प्राकृतिक स्वंभू शिवलिंग है जिसके उत्तर दिशा में एक छोटा पर्वत है जो कि नन्दी की तरह शिवलिंग के सम्मुख बैठा हुआ प्रतीत होता है। इस मैकल पर्वत से नर्मदा और सोन नदी निकलती हैं। ये दोनों बहनें हैं ( नर्मदा महात्म्य )। ये नदियां अपनी विशालता और पौराणिक महत्व के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध हैं।
इसी प्राकृतिक स्वंभू शिवलिंग ( मैकल पर्वत ) से अनेक जल स्रोतों से जल का स्राव होता रहता है जो नीचे की ओर आकर, आपस में मिलकर नाले और नदी का रूप ले लेते हैं। हमारा छत्तीसगढ़ वनांचल एवम पहाड़ पर्वतों से अच्छादित है। इन्हीं पहाड़ों पर्वतों से अनेक नदियों का उद्गम होता है। प्रसिद्ध लेखक ने भी अरपा नदी का उद्गम मैकल पर्वत की तलहटी में ही पाया है।
अरपा नदी का उद्गम स्वंभू शिवलिंग से होकर मैदानी भाग में केंदा, बिलासपुर, मटियारी में बहती हुई शिव स्वरूप शिवनाथ नदी में विलय हो जाती है। शिव से निकलकर शिव में ही समाहित हो जाती है।जैसे पावन पवित्र नदी गंगा शिव की जटाओं से निकलकर श्री हरि विष्णु के चरणों में समुद्र में विलीन हो जाती है। इसीलिए कवियों और साहित्यकारों ने अरपा का महत्त्व गंगा के समतुल्य निरूपित किया है।
इस शोध परक व्याख्या से भूगोलविद् डा पी एल चंद्राकर की पुस्तक ” कहानी अरपा की ” में अरपा का उद्गम मैकल पर्वत की तलहटी से होना पुष्ट होता है। क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में नदियों का उद्गम पहाड़ों से ही होता है। भले ही हम प्राकृतिक दुर्गम रास्तों की वजह से नदी के मुख्य स्त्रोत तक न पहुंच पाएं। अरपा नदी को कई विद्वान साहित्यकारों ने अंतः सलिला और बाह्य सलिला कहा है। इसलिए विद्वान लेखक ने मैकल पर्वत से ही अरपा के उद्गम की पुष्टि की है और वे अरपा नदी को बाह्य सलिला के रूप में देखते हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में आठ खंडों में लेखक ने नदियों पर विश्व स्तरीय व्याख्या प्रमाणों के साथ प्रस्तुत की है। मानव सभ्यता में जल और नदियों का बड़ा महत्व है। बड़ी बड़ी मानव सभ्यता संस्कृति नदियों से जुड़ी हुई हैं। छत्तीसगढ़ की जीवन रेखा अरपा नदी पर विद्वान लेखक ने प्रमाण और साक्ष्यों के प्रकाश में अपने सुविचार रखे हैं, जो कि तथ्यपरक है। यह पुस्तक यदि विद्यालयों के सिलेबस में सम्मिलित होता है तो इससे विद्यार्थियों को ज्ञान लाभ प्राप्त हो सकेगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ धन्यवाद।
डा गिरधारी अग्रवाल
एम एस सी, पी एच डी
तिलक नगर, बिलासपुर
मो 7000311146
