लखनऊ. उत्तर प्रदेश की स्थानीय कला, शिल्प और समुदायों के पारंपरिक कौशल को संरक्षित और विकसित करके स्थानीय स्तर पर रोजगार में वृद्धि हेतु शुरू की गई एक जिला-एक उत्पाद योजना (ओ.डी.ओ.पी.) वित्त पोषण सहायता योजना के तहत अब तक 5565 करीगरों एवं इकाइयों को 707 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराते हुए 70 हजार से अधिक लोगों को रोजगार से जोड़ा गया। यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने दी।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में प्रदेश के नौ जनपदों गाजियाबाद, मैनपुरी, मऊ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, आगरा, मुरादाबाद तथा भदोहीमें 73.54 करोड़ रुपये की लागत से सामान्य सुविधा केन्द्र (सीएफसी) की स्थापना का कार्य भी शुरू हो चुका है। भदोही में कालीन उद्यमियों की सुविधा के लिए 868.70 लाख रुपये की लागत से रॉ-मटेरियल प्रोसेसिंग सेंटर की स्थापना कराई जा रही है।
मुरादाबाद में ओडीओपी उत्पाद धातु शिल्प के निर्यात को बढ़ाने हेतु 958.43 लाख रुपये से हाईब्रिड इन्टरप्राइजेस रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सीफसी की स्थापना का कार्य प्रगति पर है। सिंह ने बताया कि इसी प्रकार गाजियाबाद में ओडीओपी प्रोडेक्ट यांत्रिकी उत्पाद हेतु 1488.63 लाख की लागत से स्थापित की जा रही हैै। सीएफसी में उद्यमियों के लिए मार्डन टूल रूम, रिसर्च एण्ड डेवलेपमेंट लैब, मैटेरियल टेस्टिंग आदि की सुविधा उपलब्ध होगी। साथ ही मिर्जापुर में कालीन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 757.42 लाख रुपये की लागत से वूल यार्न प्रोसेसिंग सेंटर तथा रॉ-मेटेरियल बैंक से संबंधित सीएफसी स्थापित होगी।
उन्होंने बताया कि इसी क्रम में जनपद मैनपुरी में 100.55 करोड़ रुपये से ओडीओपी उत्पाद तारकशी कला तथा वस्त्र सिलाई एवं कढ़ाई हेतु स्थापित होने वाली सीएफसी के अंतर्गत कामन टूल रूम, रॉ-मटेरियल बैंक तथा डिजाइन एण्ड डिस्प्ले सेंटर की सुविधा उपलब्ध होगी। उत्तर प्रदेश से काष्ठ शिल्प उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के विजन को गति प्रदान करने हेतु बिजनौर में 996.00 लाख की लागत से वुड सीजनिंग एण्ड केमिकल ट्रीटमेंट प्लांट एवं एडवांस टूल्स रूम के लिए सीएफसी स्थापित कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त मऊ में 684 लाख रुपये तथा आगरा में 989 लाख रुपये की लागत से ओडीओपी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए सामान्य सुविधा केन्द्र की स्थापना का कार्य शुरू हो चुका है।
